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नहीं हो पा रहा है सीएलपी नेता का चुनाव

उत्तराखंड में कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और निर्दलीय विधायकों द्वारा रखी गई कुछ शर्तों के कारण कांग्रेस विधायक दल नेता के चयन में बाधा उत्पन्न हो रही है। 70 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के 32 विधायक हैं जो बहुमत से चार कम हैं। तीन निर्दलीय और यूकेडी (पी) के एक विधायक के समर्थन से पार्टी 36 के जादुई आंकड़े तक पहुंच रही है।

सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस के अंदर गुटबाजी के कारण कांग्रेस विधायक दल के नेता के चुनने की प्रक्रिया में विलंब हो रहा है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि गहरी गुटबाजी के कारण कांग्रेस आलाकमान पर्यवेक्षकों को भेज रहा है ताकि नवनिर्वाचित विधायकों के विचार जाने जा सकें। कांग्रेस महासचिव चौधरी बीरेन्द्र सिंह ने कहा कि विधायकों का विचार जानने के लिए पर्यवेक्षक कल आएंगे।

पार्टी तीन से चार गुटों में बंटी नजर आ रही है जिनके मुखिया केंद्रीय मंत्री हरीश रावत, पूर्व केंद्रीय मंत्री सतपाल महाराज, वरिष्ठ नेता विजय बहुगुणा और पीसीसी प्रमुख यशपाल आर्या हैं। कर्ण प्रयाग से कांग्रेस विधायक अनुसूईया प्रसाद मैखुरी ने कहा कि मैं चाहती हूं कि महाराज मुख्यमंत्री बनें। इनके अलावा पिछली विधानसभा में विपक्ष के नेता हरक सिंह रावत और वरिष्ठ नेता इंदिरा हृदयेश भी नये सीएलपी नेता के तौर पर पेश किए जा रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2002 में भी एन डी तिवारी और हरीश रावत के अनुयायियों के बीच अंदरूनी संघर्ष के कारण कांग्रेस को सरकार बनाने में कठिनाईयां आई थीं।

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