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अब अनुराधा को मिल सकती है लालबत्ती

चुनाव का रुख भांपकर सपा में पहुंची अनुराधा चौधरी कुछ किए बिना ही लालबत्ती की दावेदार बन गई हैं। वह खतौली को छोड़ किसी भी सपा प्रत्याशी के प्रचार में नही पहुंची और मुलायम सिंह और अखिलेश यादव की जिले में हुई जनसभाओं में भी नजर नही आई। चुनाव में उन्होंने चौधरी अजित सिंह के खिलाफ बयानबाजी की और मुलायम को ही चौधरी चरण सिंह का राजनैतिक उत्तराधिकारी बताया था।

मुजफ्फरनगर की बघरा सीट से 2002 में चुनाव जीतकर अपने राजनैतिक कॅरियर की शुरुआत करने वाली अनुराधा चौधरी करीब दस वर्ष तक रालोद में चौधरी अजित सिंह के बाद सर्वेसर्वा रही। वह प्रदेश में भाजपा-रालोद के सहयोग से बनी मायावती सरकार में लोक निर्माण मंत्री बनीं, बाद में मुलायम सरकार में सिंचाई मंत्री रही। रालोद से संबंधित सभी महत्वपूर्ण राजनैतिक फैसलों में उनकी खूब चली। वर्ष 2004 में रालोद से सांसद बनने के बाद भी वह छह माह तक प्रदेश में मंत्री बनी रही और बाद में सिंचाई विकास एवं बाढ़ नियंत्रण आयोग की अध्यक्ष बनकर कैबिनेट मंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त रही।

2009 में मथुरा से जयंत चौधरी के सांसद बनने के बाद उनकी विरोधी लॉबी जयंत चौधरी के खेमे में चली गई और रालोद से संबंधित निर्णयों में जयंत की दखलंदाजी होने के बाद अनुराधा चौधरी का कद कम हो गया था। विधानसभा चुनावों में रालोद-कांग्रेस गठबंधन पर बातचीत के दौरान अनुराधा चौधरी इसके विरोध में खड़ी थी। वह सपा से गठबंधन को फायदे का सौदा बताती रही लेकिन उनकी एक नही चली। दूसरी ओर बुढ़ाना में रालोद कार्यकर्ता सम्मेलन में राजपाल सिंह बालियान समर्थकों के अनुराधा चौधरी को अपमानित करने के मामले में उनकी शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इसके बाद ही अनुराधा चौधरी ने रालोद का कांग्रेस से गठबंधन होने पर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली। सपा में राष्ट्रीय महासचिव बनाई गई अनुराधा चौधरी का उपयोग सपा ने केवल अजित सिंह के खिलाफ बयानबाजी कराने के लिए किया। उन्होंने जाटों को आरक्षण नही दिलाने, रालोद के जनाधार वाली सीटों को मंत्रीपद के लालच मे कांग्रेस को देने के मुद्दो पर अजित सिंह पर प्रहार किए। हालांकि मुजफ्फरनगर में वह केवल खतौली में ही सपा प्रत्याशी बच्चाी सैनी के पक्ष में चुनाव प्रचार को आई अन्य किसी प्रत्याशी ने अनुराधा चौधरी को नही बुलाया। अब चुनाव बाद सपा की सरकार बनने के बाद अनुराधा चौधरी को भी लालबत्ती मिलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। अनुराधा समर्थकों का मानना है कि इसी माह के अंत में होने वाले राज्यसभा चुनावों अथवा विधान परिषद चुनावों में भी उनका नंबर आ सकता है।

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  • Web Title:अब अनुराधा को मिल सकती है लालबत्ती