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क्या है प्रोजेक्ट जीविका का काम?

वर्ष 2007 में विश्व बैंक की आर्थिक सहायता से बिहार रूरल लाइवलिहुड प्रोजेक्ट यानी जीविका शुरू किया गया। 2010 तक प्रोजेक्ट को राज्य के 55 ब्लॉक में शुरू किया गया। दिसंबर 2011 तक राज्य में 44,759 स्वयं सहायता समूह बन गए, जिसमें 2888 ग्राम संगठनों की मदद से 81 करोड़ 66 हजार रुपए उधार दिए गए।

जीवकाजर्न के अलावा महिलाएं खाद्य सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य रक्षा का भी काम कर रही हैं। गया जिले की जीविका के डीपीएम इंचार्ज कमल किशोर कहते हैं कि एक समूह दूसरी महिलाओं को देख कर स्वयं सहायता समूह बनता गया। खास बात यह कि अगर कोई महिला लोन लेने के बाद भी व्यवसाय नहीं चला पाती तो उसे दोबारा भी उधार दिया जा सकता है।

तरक्की का यह रास्ता बिहार में हर महिला के लिए खुला है। इस प्रोजेक्ट ने नौ जिले में 55 ब्लॉक के 7.5 लाख घरों में महिलाओं को आत्म निर्भर बनाया है। ग्राम संगठन (विलेज आर्गेनाइजेशन) स्तर पर सीता, गुलाब, गंगा, अन्नपूर्णा, राधा आदि नाम से बनाए गए स्वयं सहायता समूह की कर्ताधर्ता भी महिलाएं ही हैं। इन्हीं महिलाओं में कोई बैंक मित्र का काम संभाल रही हैं तो कोई समूह को प्रशिक्षित करने का और कोई रिर्सोस पर्सन है।

गया के ही पररिया गांव की रिंकी स्नातक है और बतौर बैंक मित्र काम कर रही है। जीविका से उसे हर महीने 2200 रुपए मिलते हैं। रिंकी बताती हैं कि जब शादी हुई थी, तब वह केवल आठवीं पास थीं। पति पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उन्होंने मुझे स्नातक कराया। ग्राम संगठन की मदद से अब तक बोधगया में 375 बैंक मित्र चयनित किए गए हैं, जिसमें से 90 फीसदी पदों पर महिलाएं काम कर रही हैं।

45 प्रतिशत बढ़ी साक्षरता दर
स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद बही खाते और महिलाओं के प्रशिक्षण आदि का काम संभालने के लिए शिक्षित होना भी जरूरी है, इसलिए समूह में जुड़ने के बाद पहले चार महीने महिलाओं को शिक्षित किया जाता है, जिसका असर साक्षरता दर पर भी देखा गया है। इसीलिए जहां वर्ष 2008 में केवल 22.2 प्रतिशत महिलाएं हस्ताक्षर करने में सक्षम थीं, जिसकी दर वर्ष 2010 में बढ़ कर 67.2 प्रतिशत हो गई।

दूसरे सार्थक असर
प्रोजेक्ट जीविका ने जहां महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया, वहीं उनकी जिंदगी में दूसरे सार्थक बदलाव का बायस भी बना। महिलाओं की सेहत में सुधार के लिए भी इस प्रोजेक्ट ने उन्हें लोन दिया, जिससे वे स्वस्थ रहने लगीं। महिलाओं को परिवार नियोजन का महत्व समझाया। महिलाओं के पति और बच्चों को आत्मनिर्भर बनने में मदद की, जिससे पूरे परिवार का स्तर उठा। चूंकि महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की राह चुनी इसलिए घरेलू हिंसा और कलह से भी उन्हें मुक्ति मिली।

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  • Web Title:क्या है प्रोजेक्ट जीविका का काम?