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हारकर जीत गए होली में

भाजपा कार्यालय में खुशी का माहौल था। दो दिन पहले ही होली मनाई जा रही थी। गुलाल उड़ रहा था, पिचकारियां छूट रही थीं। मैंने पूछा- इतनी खुशियां क्या गोवा और पंजाब के नतीजों को लेकर हैं? होली के रंग में रंगा हुआ कार्यकर्ता बोला- नहीं, उत्तर प्रदेश में हमने कांग्रेस को हरा दिया। असली मुकाबला तो उत्तर प्रदेश में था। गोवा और पंजाब में तो हमने हारने की भरसक कोशिश की, लेकिन कांग्रेसी हमसे आगे निकले, वे हारने में कामयाब हो गए। उत्तर प्रदेश में हमने जीतने के लिए जी जान लगाई थी।

मैंने फिर पूछा- लेकिन सपा या बसपा के मुकाबले तो आप कहीं नहीं हैं? कार्यकर्ता ने कहा- हमारा मुकाबला उनसे नहीं, सीधा कांग्रेस से था, हमने कांग्रेसियों को हराकर दम लिया। मैंने कहा- लेकिन ऐसे कई लोग हैं, जो दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस की हार की जिम्मेदारी उनकी है, रीता बहुगुणा जोशी, दिग्विजय सिंह, राहुल गांधी सब इसकी जिम्मेदारी लेना चाहते हैं। कार्यकर्ता बोला- कांग्रेसी बड़े बदमाश हैं, हमें श्रेय नहीं देना चाहते। चलिए हम चलकर उन्हें बताते हैं।

वह 10, जनपथ की ओर तेजी से चल पड़ा। सुरक्षा गार्ड ने रोका- कहां जा रहे हो, वह भी ऐसे रंगे-पुते। कार्यकर्ता ने कहा- मैं कांग्रेस की हार की जिम्मेदारी लेने जा रहा हूं। सुरक्षा गार्ड ने कहा- यह जो लाइन लगी है, उसमें खड़े हो जाओ, यह हार की जिम्मेदारी लेने वालों की लाइन है। लाइन में सबने भाजपा कार्यकर्ता को शक से देखा, क्योंकि वह रंगा-पुता था। एक ने कहा- तुम्हें ऐसे नहीं आना चाहिए था, गमी में सफेद कपड़े पहनकर आया जाता है।

अचानक घोषणा हुई- किसी को हार की जिम्मेदारी लेने की जरूरत नहीं है। यह तय पाया गया है कि हार की जिम्मेदारी छज्जूलाल की है। जानकार कांग्रेसी ने बताया- छज्जू की कांग्रेस दफ्तर के बाहर चाय की दुकान है। उसकी चाय ने कार्यकर्ताओं में जोश पैदा नहीं किया, इसलिए हम चुनाव हार गए। मैंने पूछा- क्या उसके खिलाफ कार्रवाई होगी? कांग्रेसी कार्यकर्ता ने कहा- नहीं हो सकती, उसका चाचा तृणमूल कांग्रेस के दफ्तर में कैंटीन चलाता है। क्या करें, गठबंधन की मजबूरियां हैं।
राजेन्द्र धोड़पकर

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