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थायरॉइड ग्रंथि छोटी, खतरे बड़े

लगभग 30 ग्राम की थायरॉइड यूं तो हमारी गर्दन में कंठ के नीचे पाई जाने वाली तितली के आकार की एक ग्रंथि (ग्लैंड) है, लेकिन इसके बड़े-बड़े काम हैं। दिल की हर धड़कन के चलने से लेकर हमें ऊर्जा का एहसास कराने तक में इस ग्रंथि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसमें कोई तकलीफ हो तो हमें काफी तकलीफ हो सकती है। कैसे ख्याल रखे इसका, बता रहे हैं दीपक भारती

थायरॉइड हमारी गर्दन में कंठ के नीचे पाई जाने वाली तितली के आकार की ग्लैंड (ग्रंथि) है। इसका वजन मुश्किल से 30 ग्राम होता है, लेकिन इसका काम बेहद महत्वपूर्ण होता है। हमारे दिल की हर धड़कन, हर सांस और एनर्जी, जो हम महसूस करते हैं, में थायरॉइड ग्रंथि की भूमिका होती है। यही नहीं, यह शरीर में कोशिकाओं, ऊतकों, अंगों, हड्डियों, त्वचा और हृदय पर भी नियंत्रण रखती है। यह थायरॉक्सिन हार्मोन का स्नव
करती है, जो शरीर की मेटाबोलिक क्रियाओं को संभव बनाता है। यह हार्मोन दो तरह का होता है, थायरॉक्सिन और ट्राईडोथॉयरोनीन (जिसे सरल भाषा में टी 3 और टी 4 भी कहते हैं) थायरॉइड ग्रंथि का नियंत्रण पिटय़ूटरी ग्रंथि करती है।

इससे कैंसर भी हो सकता है। वैसे कैंसर के कुल प्रतिशत में थायरॉइड कैंसर का प्रतिशत केवल 2 है। थायरॉइड ग्रंथि के बढ़ने से घेंघा रोग उत्पन्न जाता है, जिसे हम आयोडीन नमक के विज्ञापन में कई बार देखते हैं। इसके मरीजों का गला अप्रत्याशित तौर पर बढ़ा दिखाई देता है। प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने के कारण थायरॉइड आनुवांशिक भी हो सकता है, क्योंकि प्रतिरोध तंत्र के गुण एक पीढ़ी से दूसरी में पहुंच जाते हैं।
अगर किसी व्यक्ति के शरीर में थायरॉइड हार्मोन की कमी हो जाती है तो उसकी क्रियाओं पर इसका असर पड़ता है, जिसका नतीजा हाइपोथायरॉइडिस्म के रूप में सामने आता है। इसके ठीक उलट जब किसी में थायरॉइड
हार्मोन का स्तर निर्धारित क्षमता से ज्यादा हो जाता है तो वह हाइपरथायरॉइडिस्म की बीमारी का शिकार हो जाता है। दोनों ही स्थितियों में व्यक्ति में इन बीमारियों के लक्षण दिखाई देने लगते हैं, इसे ही सरल भाषा में थायरॉइड होना कहते हैं।

हाइपोथायरॉइडिस्म
थायरॉइड ग्रंथि जब कम मात्र में टी 3 और टी 4 का स्राव करती है तो यह बीमारी पैदा होती है। इसकी वजह से प्रतिरोधी तंत्र थायरॉइड ग्रंथि पर हमला कर उसे निष्क्रिय कर देता है। इसका असर शरीर पर पड़ता है और पीड़ित व्यक्ति की गतिविधियां सुस्त पड़ने लगती हैं। इसमें दिल की हड्डिया कमजोर हो जाती हैं।

इस स्थिति में हृदय शरीर के लिए जरूरी ब्लड को पंप नहीं कर पाता, जिससे हार्ट फेल का खतरा बढ़ जाता है। हाइपोथायरॉइडिस्म होने पर हाइपरटेंशन और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण भी दिखने लगते हैं।

लक्षण
थायरॉइड होने पर ये प्रमुख लक्षण दिखाई देते हैं- आलस्य महसूस करना, दिन भर उखड़ा-उखड़ा सा रहना, ठंड का लगना, हड्डियों में एंठन और दिल की धड़कन का धीमे चलना, याद्दाश्त का कमजोर हो जाना, कहीं ध्यान का न लगना, वजन का तेजी से बढ़ना, आवाज का भारी हो जाना, बालों का पतला होना आदि।

देश में चार करोड़ से ज्यादा लोग थायरॉइड की चपेट में।
90% लोग समय से परीक्षण और इलाज न कराने की वजह से प्रभावित।
साठ से ऊपर के लोगों में थायरॉइड की पहचान करना मुश्किल।
उम्र के साथ बढ़ता है थायरॉइड का खतरा।
महिलाओं में छह गुना ज्यादा होता है इसका खतरा।

हाइपरथायरॉइडिस्म
यह तब होता है, जब शरीर में थायरॉइड हार्मोन खासकर टी 3 का लेवल बढ़ जाता है। इसके बढ़ने से शरीर का वजन कम होने लगता है, सांस लेने में दिक्कत होने लगती है, छाती में दर्द शुरू हो जाता है और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

लक्षण
उत्तेजना और दिल की धड़कन बढ़ना, ज्यादा पसीना निकलना, त्वचा का गर्म होना, नींद में कमी होना।
घेंघा रोग: यह थायरॉइड ग्रंथि के बढ़ जाने से होता है। इससे प्रभावित व्यक्ति को खांसने और सोने में तकलीफ होती है तथा खाना खाते समय भी दिक्कत होती है।

थायरॉइड का पता लगाने के लिए खुद कर सकते हैं टेस्ट
इसके लिए कुछ खास करने की जरूरत नहीं है, बस एक गिलास में पानी लें और शीशे के सामने खड़े हो जाएं। शीशे में अपनी गर्दन के कंठ के नीचे के हिस्से को गौर से देखें, यहीं पर थायरॉइड ग्रंथि होती है। अब अपने सिर को पीछे कर पानी का एक घूंट पिएं। ऐसा कई बार करके देखें। अगर बार-बार कंठ के नीचे के हिस्से में आपको उभार दिखता है तो इसकी आशंका है कि आपका थायरॉइड  बढ़ा हु़आ है। ऐसी हालत में डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होगा।

थायरॉइड बढ़ने के कारण

कम या ज्यादा आयोडीन का इस्तेमाल
दिल की बीमारी में ली जाने वाली दवाइयां हाइपोथायरॉडिज्म का खतरा बढ़ाती हैं
तनाव की वजह से हार्मोन असंतुलन होता है, जिससे थायरॉइड बढ़ सकता है
सिगरेट व तंबाकू भी इसके कारक

बचाव के उपाय

ज्यादा समय तक धूप में रहने से बचना
आयोडीन की संतुलित मात्र का ध्यान रखें
ज्यादा सोयाबीन या इसका आटा खाने से बचना
डिस्टिल्ड वाटर पीने से बचना, क्योंकि इसमें खनिज लवण कम होते हैं
नियमित अंतराल पर डॉक्टर से चेकअप

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