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एक दूसरे को चुनौती देने उतरेंगे श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया

त्रिकोणीय सीरीज के दूसरे फाइनल में आठ विकेट से मिली जीत से उत्साहित श्रीलंका ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे और अंतिम फाइनल में उतरेगा तो उसका लक्ष्य और नजर सिर्फ खिताब पर कब्जा कर खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करना होगा।
 
एडिलेड ओवल में श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मंगलवार को दूसरे फाइनल मुकाबले को 32 गेंदें शेष रहते हुए आठ विकेट से मैच अपने नाम कर लिया था। टीम की इस शानदार जीत के हीरो साबित हुए तिलकरत्ने दिलशान।
 
इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए विपक्षी टीम को 50 ओवरों में छह विकेंट के नुकसान पर 271 रनों का लक्ष्य दिया था। लेकिन मैदान में पहले ही जीत का जज्बा लेकर उतरे श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने कंगारूओं को पानी पिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और 44.2 ओवरों में महज दो विकेट के नुकसान ने 274 का विजई स्कोर बना डाला। माहेला जयवर्धने ने टीम की ओर से 80 रनों का योगदान दिया और दिलशान ने अपनी शतकीय पारी खेलकर 106 रन बनाकर टीम को जीत के करीब पहुंचा दिया।
 
दोनों टीमों के बीच कल खेले जाने वाले आखिरी मुकाबले को श्रीलंका की दूसरे फाइनल में मिली शानदार जीत के बाद कंगारूओं के लिए काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। एक समय में त्रिकोणीय सीरीज में जीत की प्रबल दावेदार मानी जा रही टीम इंडिया पहले ही स्वदेश लौट चुकी है। सीरीज से भारत के बाहर होने के बाद और पहले फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की श्रीलंका पर जीत से भले ही सीरीज को एकतरफा माना जाने लगा था लेकिन दूसरे टेस्ट में हार का बदला लेने के बाद से श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को पेरशानी में डाल दिया है।
 
हालांकि दोनों ही टीमों की खुद की परेशानियां भी कुछ कम नही हैं। श्रीलंका में जहां थिसारा परेरा और फरवीज मारूफ दोनों ही पीठ और काफ इंजरी से जूझ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर टीम के कप्तान माइकल क्लार्क अपनी पिंडली और पीठ की चोट के कारण तीसरे और संभवत आगामी सीरीज में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में भी टीम का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। इसके अलावा डेविड वॉर्नर ग्रोइन चोट से ग्रसित हैं तो ब्रेट ली पैर में चोट के बावजूद भी खेल रहे हैं।
 
ऐसे में दोनों ही टीमों में चोटिल खिलाड़ियों की अच्छी खासी संख्या उनके लिए निर्णायक मुकाबले में कुछ मुश्किलें पैदा तो कर ही सकती है।
 
हालांकि इसके बावजूद दोनों टीमों के जोश और जज्बे के आगे यह फिलहाल कहना मुश्किल है कि कौन किसे धूल चटाता है। सीरीज के पहले फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने जहां विपक्षियों को कड़ा संघर्ष देते हुए 321 का शानदार स्कोर बनाया था वहीं श्रीलंका ने अपने पुछल्ले बल्लेबाजों के शानदार प्रदर्शन से 306 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया की जीत को मुश्किल बना दिया था।
 
पहले मैच का बदला श्रीलंका ने दूसरे फाइनल में बाखूबी लेकर यह भी साबित किया है कि कोई भी टीम किसी से 19 या 20 नहीं है। ऑस्ट्रेलिया की ओर से फाइनल मुकाबले में माइकल क्लार्क का न होना श्रीलंका को काफी फायदा पहुंचा सकता है क्योंकि लगातर शानदार फॉर्म में चल रहे क्लार्क ने दूसरे फाइनल में भी 117 रनों की शानदार पारी खेली थी जबकि डेविड वॉर्नर ने शतक जड़ा था। बल्लेबाजी में मजबूत स्थिति में दिख रही टीम के लिए उसका गेंदबाजी क्रम फिलहाल काफी कमजोर नजर आ रहा है। कप्तान क्लार्क खुद मान चुके हैं कि दूसरे मैच में टीम की गेंदबाजी बेहद खराब थी जिसका नतीजा हार है।
 
गेंदबाजी में टीम को मजबूती देने के नथान ल्योन पर सबकी नजरें होंगी। हालांकि फाइनल मुकाबले में जेम्स पेटिनसन को शामिल किया जाना कुछ मुश्किल लग रहा है। खबर है कि ल्योन या बेन हिलफेनहॉस को उनकी जगह शामिल किया जा सकता है।
 
वैसे अगर देखा जाए तो 1990 के बाद जब भी ऑस्ट्रेलिया ने त्रिकोणीय सीरीज में फाइनल मैच खेला है जीत उसी की हुई है। ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे फाइनल में 1993-94 और 1997-98 में दो बार दक्षिण अफ्रीका को और एक बार 2007-08 में श्रीलंका को हराया है।

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