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कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन करते हैं वेस्ट मैनेजमेंट एक्सपर्ट

कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन करते हैं वेस्ट मैनेजमेंट एक्सपर्ट

विकास के इस दौर में रोज बाजार में नये-नये उत्पाद आ रहे हैं और पुराने रद्दी की टोकरी में जा रहे हैं। ऐसे में कचरे का इंतजाम व उनका निपटान का कार्य एक बड़े क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। लिहाजा कचरा प्रबंधन विशेषज्ञों की भूमिका अहम हो गई है। कचरा प्रबंधन विशेषज्ञ अर्थात वेस्ट मैनेजमेंट एक्सपर्ट ऐसे प्रोफेशनल्स होते हैं, जिन्होंने पर्यावरण अभियांत्रिकी यानी एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की है या पर्यावरण विज्ञान में ग्रेजुएट हैं और सभी प्रकार के कचरों के प्रबंधन एवं उनके दोबारा उपयोग के कार्यों से जुड़े हैं।

इंजीनियरिंग की दूसरी विधाएं जैसे कैमिकल, सिविल, माइक्रोबायोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी के स्टूडेंट्स भी वेस्ट मैनेजमेंट के विभिन्न पहलुओं के कार्यों को अंजाम देते हैं। कुछ लोग कचरों से नये प्रोडक्ट तैयार करते हैं तो कुछ इनमें से उपयोगी धातुओं व कीमती सामान चुन कर अलग करते हैं। आज कई इलेक्ट्रॉनिक सामान कचरे बनते जा रहे हैं। सेल फोन इसका ज्वलंत उदाहरण है। प्रौद्योगिकी के जानकार इनको हार्वेस्ट करने के अपने मिशन में जुटे हैं। कार्बनिक कचरों का निपटान वर्तमान दौर में बिजनेस का एक व्यापक क्षेत्र बन गया है। भारत में पैदा होने वाले कचरे की कुल मात्र में तकरीबन 35 प्रतिशत हिस्सा कार्बनिक कचरे का है। बायो-मेडिकल क्षेत्र के कचरों समेत जल प्रबंधन, निर्माण कार्य से उत्पन्न कचरों और मलबों तथा हानिकारक कूड़े-करकट के प्रबंधन के लिए भी पेशेवर विशेषज्ञों की सलाह ली जाती है। कचरा प्रबंधन का कार्य आमतौर पर निजी और सरकारी, दोनों क्षेत्रों के संगठनों द्वारा निष्पादित किया जाता है। सरकार की ओर से पेशेवर कचरा प्रबंधन की दिशा में भी पहल की गई है।

वेतन
कचरा प्रबंधन विशेषज्ञ के तौर पर एक एनवायरमेंटल इंजीनियर करीब 12 से 15 हजार और कई बार उससे अधिक मासिक वेतन प्राप्त करते हैं। हालांकि, वेतन आमतौर पर विशेषज्ञ की अभिरुचि, विशेषज्ञता और काम करने की जगह पर निर्भर करता है।

दक्षता

हाथ में मिट्टी लगाने के लिए तैयार रहना होगा।
आपको संसाधन संपन्न होना चाहिए।
आपका दृष्टिकोण रचनात्मक होना चाहिए।
पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता व रुचि हो।
पर्यावरण से संबंधित कानून की जानकारी हो।

कैसे करें मुकाम हासिल 
बारहवीं तक विज्ञान विषयों में पढ़ाई करना आवश्यक है। इसके बाद एनवायरमेंटल, सिविल, कैमिकल अथवा मैकेनिकल इंजीनियरिंग या माइक्रोबायोलॉजी अथवा बायोटेक्नोलॉजी में ग्रेजुएट डिग्री हासिल होनी चाहिए। इनमें प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से होता है। आप एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा आप पर्यावरण विज्ञान या पर्यावरण अध्ययन में बीएससी प्रोग्राम करने के बाद भी एमए/ एमएससी कर सकते हैं। आप इस क्षेत्र में कार्यरत एनजीओ के साथ काम करने का भी चयन कर सकते हैं और अनुभव प्राप्त करने के बाद अपनी संस्था खोल कर इस क्षेत्र में कार्य कर सकते हैं।

संस्थान

इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद
वेबसाइट
: www.ismdhanbad.ac.in

देश के विभिन्न जगहों पर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान
वेबसाइट:
www.jee.iitd.ac.in

दिल्ली विश्वविद्यालय
वेबसाइट
: www.du.ac.in

स्कूल ऑफ एनवायरमेंटल साइंस, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय
वेबसाइट:
www.jnu.ac.in

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