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छोटी-मोटी समस्याएं खुद ही निपटा लें

अपने ऑफिस जाते समय धीरेन्द्र की अचानक एक बाइक से टक्कर हो गयी, वह गिर पड़े, उनका पैर छिल और कट गया, जिसके कारण उनके पैर से खून बहने लगा। वहीं स्मिता अपने पति और बच्चों के साथ राजेंद्रनगर में रहती हैं। पति के ऑफिस जाने के बाद घर का काम करते वक्त उन्हें खुद की भी सुध नहीं रहती है। अचानक वह अपने घर की सीढ़ियों से उतरते हुए मोच का शिकार हो गयीं। ये दोनों ही अलग अलग घटनाएं हैं, लेकिन दोनों ही छिटपुट घटनाओं की बानगी भर है। ऐसी छोटी-मोटी दुर्घटनाएं अक्सर होती रहती हैं, लेकिन इनको नजरंदाज करना भी आपको महंगा पड़ सकता है।

क्या हैं ये सामान्य स्वास्थ्य समस्यायें

जख्म हो जाना
खेलते वक्त, काम करते समय मामूली चोट या कट लगना अथवा वाहन से मामूली दुर्घटना होना। ऐसी समस्याओं से हम अक्सर दो-चार होते रहते हैं। सामान्यतया इनसे कुछ दवाओं को लेकर या बैंडेज करवाकर एक हफ्ते के भीतर राहत पा सकते हैं। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार चोट लगने पर एक चीज जो बहुत जरूरी है, वह है टिटनेस का इंजेक्शन। टिटनेस के कीटाणु किसी भी तरह के जख्म से शरीर में प्रवेश कर पूरे शरीर को प्रभावित कर सकते हैं।

मोच आ जाना
शरीर के किसी भाग के अचानक से मुड़ जाने पर वहां दर्द व सूजन पैदा हो जाती है, जो मोच कहलाती है। गर्म पानी में नमक डालकर मोचग्रस्त अंग की सिकाई करें। यदि मोचग्रस्त अंग में घाव हो गया है या खून निकला है, तो हल्दी और प्याज पीसकर सरसों के तेल में खौला कर उसे थोड़ा ठंडा करके बांधें। मोचग्रस्त अंग पर मालिश न करें। इससे नसें इधर-उधर होकर दर्द बढ़ा सकती हैं। इन उपायों से यदि राहत न मिले तो डॉक्टर से मिलें।

जोड़ों में दर्द होना
वर्तमान में हर पांच में से एक व्यक्ति जोड़ों के दर्द से त्रस्त है। हालांकि बढ़ती उम्र में इस समस्या को सामान्य कहा जा सकता है। कई बार ऐसा भी होता है कि चोट ऊपर से दिखाई नहीं देती है, लेकिन रह-रहकर दर्द होता है। डॉक्टर कहते हैं, अक्सर इस तरह के दर्द की तीव्रता आराम करने के साथ ही कम हो जाती है, लेकिन दर्द में कमी न आने पर उचित सलाह लेकर इलाज कराना चाहिए।

उल्टी और अतिसार होना
असंतुलित और अनियमित खान-पान से, दूषित पानी उपयोग करने से, खाली पेट चाय पीने से, अधिक ठंडे पदार्थों के सेवन से, पाचन क्रिया ठीक न होने से, लिवर की समस्या के कारण उल्टी व अतिसार जैसे रोग पैदा हो जाते हैं। ऐसे में हल्का खाना, जैसे मूंग की दाल खाएं और ग्लूकोज का पीना पीएं। लेकिन यदि इससे समस्या से जल्द छुटकारा न मिले तो डॉक्टरी सलाह आवश्यक है।

आंख का लाल हो जाना
अक्सर गर्मियों के दिनों में आंखें तेज धूप के कारण लाल हो जाया करती हैं, जिन्हें स्वच्छ ठंडे पानी से धोना चाहिए। आंखों में आईटोन दवा भी डाल सकते हैं, लेकिन भरपूर नींद न लेने के कारण भी आंखें लाल हो जाती हैं, इसलिए आराम करना भी इनका इलाज हो सकता है। लेकिन इस सबके बावजूद भी आपको रहत ना मिले तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

शरीर के किसी भी भाग में दर्द होना
शरीर के किसी भी भाग मे होनेवाला दर्द स्वयं में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह अन्य बीमारियों का अलार्म है। दर्द अनेक तरह के हो सकते हैं - शरीर के किसी भी भाग मे बिना किसी कारण के अचानक होनेवाला दर्द, चोट लगने का दर्द, बीमारी का दर्द, मासिक धर्म में दर्द आदि। इनके लिए दर्दनिवारक का प्रयोग किया जा सकता है। यदि दर्द निवारक से इनमें कमी नहीं हो रही तो ऐसे में आपको डॉक्टर से सलाह करनी चाहिए।

सन बर्न हो जाना
गर्मियों के मौसम में सनबर्न होना आम समस्या है। त्वचा के धूप के संपर्क में आने पर त्वचा में लालिमा, सूजन व कभी-कभी फफोले भी हो जाते हैं। सनबर्न होने पर ठंडे पानी की पट्टियां रखना चाहिए और यदि यह इनसे न दूर हो, तब डॉक्टरी इलाज करना चाहिए। दया मेमोरियल हॉस्पिटल के प्रमुख डॉ. कपूर कहते हैं कि अधिकतर लोग अब ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज नहीं करते हैं, क्योंकि तेज रफ्तार जिंदगी में सबको घर से लेकर बाहर तक तमाम अलग-अलग मोर्चों पर मुस्तैद रहना पड़ता है, जिसके लिए फिट होना सबसे अहम है। लेकिन ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जो मर्ज के बढ़ जाने पर ही इलाज की सोचते हैं, जिससे उनका पैसा तो अधिक खर्च होता ही है साथ ही शारीरिक तकलीफ भी झेलनी पड़ती है। एक चिकित्सकीय सर्वे की मानें तो डॉक्टरों के पास दिनभर में ऐसे 10 से 15 केस आ जाते हैं, जिन्हें ऐसी ही सामान्य समस्याएं होती हैं, जिसकी मुख्य वजह सामान्य समस्याओं को नजरअंदाज करना होता है।

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