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होली को कहीं बदरंग न कर दे कृत्रिम रंग

होली में रंग और गुलाल की महत्ता है। अन्य त्योहारों की तरह इस पर्व में भी बाजारवाद पूरी तरह हावी है। होली के मौके पर सजने वाले बाजारों में अब कृत्रिम रंग और गुलाल का वर्चस्व हो गया है। यह सब मुनाफा कमाने की होड़ में हुआ है।

होली पर्व को लेकर पटना सहित बिहार के सभी बाजार रंगों, गुलालों और पिचकारियों से सज गए हैं, लेकिन इनमें अधिकांश कृत्रिम रंग हैं, जो त्वचा एवं आंखों के लिए नुकसानदेह हैं।

बुजुर्गों के मुताबिक पूर्व में जहां एक खास तरह के पेड़ की छाल को सुखाकर और पीसकर गुलाल बनाया जाता था, वहीं टेसू और पलाश के फूलों से शुद्ध रंग बनाया जाता था, लेकिन अब ये बातें केवल कहने और सुनने की रह गई हैं। टेसू तो अब मात्र साहित्य की बात हो गई है।

बुजुर्ग बताते हैं कि टेसू मई-जून महीने में खिलता था, जिसे सुखाकर रख दिया जाता था। होली के दिनों में उन्हीं फूलों को पानी में उबाल कर रंग बनाया जाता था। अब न ऐसा गुलाल देखने को मिलता है और न ही ऐसा रंग ही होली में इस्तेमाल किया जा रहा है।

जानकार बताते हैं कि आज के समय में जो गुलाल बाजार में उपलब्ध हैं, उसमें एसिड, स्कारलेट और कई तरह के खतरनाक रासायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं। चर्मरोग चिकित्सक डॉं सरोज कहती हैं, ''जो रंग बाजार में बिकते हैं वे कृत्रिम होते हैं। दरअसल, ये रंग कपड़ों के रंगने के काम आते हैं। इन रंगों का दुष्प्रभाव आंख, कान, त्वचा सहित शरीर के कई अंगों पर पड़ता है।'' 

रंग के कारोबारी रंजन कुमार कहते हैं कि कृत्रिम रंगों का प्रचलन कोई नया नहीं हैं। वह कहते हैं कि पहले बिहार में ऐसे रंग कम मिलते थे। होली के दिनों में बिकने वाले अधिकांश रंग ऐसे होते हैं जो कपड़ा और प्लास्टिक रंगने के काम आते हैं।

वह बताते हैं कि पुराने समय में बिहार और झारखंड के लोग केवल टेसू के रंग होली में इस्तेमाल करते थे। बिहार में नील की खेती सबसे अधिक होती थी, इसलिए यहां नीला रंग तैयार होता था। होली के मौके पर भी इन नीले रंगों का खूब इस्तेमाल किया जाता था।

एक अन्य चिकित्सक कहते हैं, ''कृत्रिम रंग लगने से चेहरे पर चिनचिनाहट होने लगती है और इन रंगों को धोने के बाद गाल के त्वचा पर लाल-लाल छाले पड़ जाते हैं और खुजली होने लगती है। इन रंगों से आंखों को भी काफी नुकसान होने का भय बना रहता है।'' वह स्पष्ट कहते हैं कि होली में कृत्रिम रंगों के उपयोग से बचने में ही बुद्धिमानी है।

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