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हर संघर्ष के बाद नए रूप में उभरते हैं मुलायम

हम कई महीनों से एक विज्ञापन देख रहे थे, जिसमें लाल टोपीधारी साइकिल सवार हाथी को ‘ओवरटेक’ करता दिखाया जाता था। खरामा-खरामा चलती यह साइकिल हाथी के ऊपर से छलांग लगाकर उससे इतना आगे निकल जायेगी, कितनों ने सोचा था? मुलायम सिंह और उनकी समाजवादी पार्टी ने वह चमत्कार कर दिखाया है।

विकलांग विधानमंडलों के इस दौर में देश के सबसे बड़े सूबे में बहुमत हासिल कर लेना आसान नहीं था। पिछले पांच साल से वे एक प्रतिशोधी हुकूमत से जूझ रहे थे। इस दौर में कभी परछाई समझे जाने वाले साथी दूसरे पाले में जा खड़े हुए थे, फिर राष्ट्रीय पार्टियों ने भी अपनी समूची ताकत उत्तर प्रदेश की जंग में झोंक दी थी। आजाद भारत में यह पहला मौका है जब चतुष्कोणीय मुकाबले की मारामारी में कोई दल इस बुलंदी के साथ सतह से ऊपर उठा है।

कभी उनके एक सहयोगी ने मुझसे कहा था कि नेताजी को अगर अपने सवरेत्तम स्वरूप में देखना है तो उनके दिक्कत भरे दिनों पर गौर करना। यकीनन, हर संघर्ष के बाद हम एक नया मुलायम सिंह पाते हैं- पहले के मुकाबले अधिक परिपक्व और सुदृढ़। जो थम जाये, वह मुलायम सिंह नहीं। यह ठीक है कि चुनावी लड़ाई उन्होंने बेहद शानदार तरीके से जीत ली है पर उनका दूसरा इम्तिहान तत्काल शुरू हो गया है। यह वो अग्नि परीक्षा है जिसमें से हर नेता को गुजरना पड़ता है, वह है जनता की अपेक्षा।

दरअसल, उत्तर प्रदेश की जनता ने पिछली बार भी ऐसा ही प्रयोग किया था। उन्होंने मायावती को बहुमत से नवाज कर सत्ता का सिरमौर बनाया था। आप मई 2007 के दिनों में लौटिए। लगता था जैसे उत्तर प्रदेश उम्मीदों का महाकुंभ नहा रहा है। पर हुआ क्या? इस बार भी जब मतदान केन्द्रों पर लम्बी लाइनें लगी थीं तो सहज समझ में आ गया था कि लोग परिवर्तन चाहते हैं।

पिछली बार समाजवादी पार्टी ने नारा दिया था- उत्तर प्रदेश यानी उत्तम प्रदेश। अब मुलायम सिंह और उनके सहयोगियों के ऊपर यह नेक जिम्मेदारी फिर से आ पड़ी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अखिलेश यादव ने जब मंगलवार की दोपहर यह बयान दिया कि मायावती के हाथी कायम रहेंगे और बदले की राजनीति नहीं होगी तो लोगों को आश्वस्ति का एहसास हुआ। मौजूदा उत्तर प्रदेश तरक्की चाहता है और इसके लिए नेताओं के नजरिये में बदलाव भी। यहां बताता चलूं। अखिलेश इस चुनाव में ऊजर्स्वित और संयमित नेता के तौर पर उभरे हैं। आशा है, वे अपनी इस इमेज में और इजाफ़ा करेंगे।

चलते-चलते ‘हिन्दुस्तान’ के एक विनम्र प्रयास ‘आओ राजनीति करें’ की चर्चा। इस अभियान के बाद जिस तरह मतदाताओं की संख्या और वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई, उसे सब जानते हैं। हम उम्मीद कर सकते हैं कि अब उत्तर प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने के साझा अभियान की शुरुआत होगी। ‘हिन्दुस्तान’ इस मामले में जनता और उसके नुमाइंदों का पार्टनर बना रहेगा।

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