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सिर्फ उत्तराखंड बहुमत से दूर

उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, मणिपुर और गोवा में राजनीतिक दलों को स्पष्ट बहुमत मिला है। इसलिए अब वहां नई सरकारों के गठन का रास्ता साफ हो गया है। मगर, उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे के मुकाबले से इनमें से कोई भी अपने बूते सत्ता तक पहुंचने की स्थिति में नहीं है। हालांकि, कांग्रेस ने सरकार बनाने को दावा किया है।

पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन ने बहुमत हासिल कर लिया है। यहां पर अब तक कोई भी पार्टी लगातार दोबारा सत्ता में नहीं आ पाई है, लेकिन अकाली दल ने दूसरी बार जीत हासिल कर कांग्रेस को जोरदार झटका दिया है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल फिर से राज्य की कमान संभालेंगे। उत्तराखंड में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में वहां सरकार बनाने के लिए आने वाले दिनों में जोड़-तोड़ की संभावना है।

बसपा, यूकेडी और निर्दलीय विधायक इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। भाजपा ने अंतिम समय में बी.सी. खंडूड़ी को राज्य की कमान सौंपी थी। खंडूड़ी राज्य में भाजपा की स्थिति सुधारने में तो सफल रहे, लेकिन कोटद्वार से खुद चुनाव हार गए।

उत्तराखंड में कांग्रेस को उम्मीद है कि बागी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतने वाले दो विधायक दुर्गापाल और मंत्रीप्रसाद नैथानी घर वापसी करेंगे। ऐसे में अगर कांग्रेस को यूकेडी का साथ मिल जाए तो वह सरकार बना सकती है। मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पार्टी ने सभी विकल्प खुले रखे हैं।

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