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कांग्रेस विरोधी मोर्चे को फिर से हवा देगी भाजपा

पांच राज्यों के चुनाव नतीजों को कांग्रेस के खिलाफ माहौल का नतीजा मान रही भाजपा एकबार फिर गैर-कांग्रेस भावनाओं का नेतृत्व करने का सपना बुनने लग गई है। पार्टी मान रही है कि संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने की केंद्र की कथित कोशिशों को मुद्दा बनाकर वह गैर कांग्रेस गैर भाजपा शासित राज्यों का समर्थन हासिल कर सकती है।

अगले सप्ताह शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दौरान भाजपा अपनी इस रणनीति को परवान चढ़ाने की कोशिश करेगी। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इन खबरों की पुष्टि की है कि ममता बनर्जी बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के लगातार संपर्क में हैं। ममता के अलावा भाजपा उड़ीसा में नवीन पटनायक और तमिलनाडु में जयललिता को अपने संभावित सहयोगियों के तौर पर देख रही है। भाजपा के नेता यह मान रहे हैं कि ममता बनर्जी यूपीए से समर्थन वापसी का मौका तलाश रही हैं। ममता की कांग्रेस के प्रति लगातार नाराजगी व शरद पवार की असहजता के अलावा नेशनल सेंटर फॉर काउंटर टेरेरिज्म पर गैर-कांग्रेस शासित राज्यों के विरोध ने भाजपा की उम्मीदें बढ़ाई हैं।

भाजपा में शीर्ष स्तर पर यह राय बनी है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव समाप्त होने के साथ ही अल्पसंख्यक बनाम ओबीसी का मसला भी खत्म हो गया है। यूपी में पार्टी को ध्रुवीकरण का कोई फायदा नहीं मिला है। जो परिणाम आए हैं उसमें यह भी साफ है कि भाजपा की मुस्लिम विरोध की राजनीति ज्यादा समय तक चलने वाली नहीं है।

इसे ध्यान में रख पार्टी के रणनीतिकार मुस्लिम विरोध की नीति पर ज्यादा जोर न देने की वकालत कर रहे हैं। बजाय इसके भाजपा गोवा की जीत में ईसाई समुदाय की भूमिका को जोर शोर से उठा कर अपनी छवि दुरस्त करना चाहती है।नतीजों के बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने साफ कहा कि ये चुनाव यूपीए व कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ जनादेश है और आगे की राष्ट्रीय राजनीति में इसका प्रभाव होगा।

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