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उत्तर प्रदेश चुनाव की परीक्षा में गडकरी फेल

भाजपा के लिए पांच राज्यों के चुनाव में कहीं खुशीं तो कहीं गम का माहौल रहा। पार्टी ने सत्ता विरोधी लहर को मात देते हुए उत्तराखंड में अपनी बढ़त बरकरार रखी, जबकि पंजाब में उसने सहयोगी अकाली दल के साथ मिलकर दोबारा सत्ता में आने का इतिहास रचा।

गोवा में भाजपा मनोहर पार्कर के नेतृत्व में कांग्रेस से सत्ता छीनने में कामयाब रही। मगर उत्तर प्रदेश में गडकरी के तमाम प्रयोग धराशायी हो गए। उमा भारती, संजय जोशी और तमाम विरोध के बावजूद बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी से जोड़ना कोई फायदा नहीं दिला पाया। गडकरी ने यूपी की स्थिति पर केवल इतना कहा कि वहां सपा के हक में वोटों का ध्रुवीकरण हुआ, इसीलिए उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। हालांकि उन्होंने कहा कि वहां पार्टी पूरी मेहनत व लगन से लड़ी।

उल्लेखनीय है कि कुशवाहा को भाजपा से जोड़ने के फैसले का लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी नेता सुषमा स्वराज ने सबसे ज्यादा विरोध किया था। यूपी में चुनावों का कामकाज संभाल एक रहे आला नेता ने माना कि नतीजा पार्टी के लिए बड़ा झटका है और प्रदेश में भाजपा को दोबारा खड़ा करना कठिन चुनौती होगी। उधर, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज जोर दे रही हैं कि पार्टी को यूपी के नतीजों की ठीक से समीक्षा करनी होगी।

वहीं, उत्तराखंड में मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी की हार ने भाजपा का गणित बिगाड़ दिया। पार्टी के लिए यह नतीजा नई मुसीबतें लेकर आया। भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते गद्दी से हटाए गए रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ चुनाव जीत गए।

इससे ‘खंडूड़ी हैं जरूरी’ के नारे के साथ चुनाव मैदान में उतरने वाली पार्टी दुविधा में पड़ गई। हालांकि सरकार बनाने के लिए राजनाथ सिंह, अनंत कुमार को देहरादून रवाना करने का फैसला भी हो गया। आला सूत्रों ने बताया कि अब बतौर मुख्यमंत्री पहला विकल्प भगत सिंह कोश्यारी हो सकते हैं।

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