DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शांति, खुशी और खामोशी

सुबह 7 बजे, सन्नाटे में लिपटा भाजपा दफ्तर। 8 बजे, भाजपा दफ्तर के कर्मचारी आने लगे। चारों तरफ पसरा सन्नाटा। 9 बजते-बजते टीवी पर भाजपा की शुरुआती बढ़त दिखाई देने लगी। भाजपा कार्यालय पर इसका असर भी दिखा और गाड़ियों की आमद शुरू हो गई। सन्नाटे की जगह शोर ने ले ली। लोगों की आवक बढ़ती गई। कभी तालियां तो कभी नारेबाजी। पर घड़ी की सूइयों के साथ नतीजे आने लगे तो शाम ढलते-ढलते भाजपा दफ्तर पहले की तरह सुनसान हो चला था।

इससे पहले छोटे-मंझोले नेता आने लगे। आस-पास के शहरों से छोटे-मंझाेले नेता लखनऊ कार्यालय पहुंचने लगे। बड़े नेताओं को फोन कर यह साबित करने में लगे रहे कि उन्होंने पहले ही भाजपा की बढ़त की घोषणा कर दी थी या उन्होंने भाजपा को जिताने के लिए क्या नहीं किया। अबीर-गुलाल, ढोल नगाड़े का इंतजाम होने लगे। मिठाइयों के ऑर्डर दिए जाने लगे। सौ से ज्यादा कार्यकर्ता भी जमा हो चुके थे। फोन पर लोग अपने आने की सूचना देते रहे।

11 बजे वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र भी अपने लाव-लश्कर के साथ कार्यालय पहुंचे। लेकिन यह माहौल ज्यादा देर तक नहीं रहा। 11 बजते-बजते मीडिया में भाजपा की सीटों पर बढ़ोतरी दिखनी बंद हो गई। थोड़ी देर में ही भाजपा के पिछड़ने की खबर आने लगी। अब नेताओं का सारा जोर यह जानने पर रहा कि कहां पर क्या चल रहा है। धीरे-धीरे भाजपा दफ्तर में जमा भीड़ छंटने लगी। कुशवाहा और उमा भारती फैक्टर पर बहस होने लगी। शाम होते-होते तो यहां इक्का-दुक्का लोग ही नजर आ रहे थे और परिसर में भी अजीब सी खामोशी छा गई।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:शांति, खुशी और खामोशी