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बस एक खामोशी की चादर

पार्टी का कार्यालय हमेशा की तरह बड़े गेट के पीछे बंद रहा। सन्नाटे और खामोशी की चादर में लिपटा हुआ। मीडिया की ओबी वैन और चैनल के लोग ही इस सन्नाटे को तोड़ते नजर आए। उधर, मुख्यमंत्री मायावती के आवास 13 माल एवेन्यू में पार्टी महासचिव सतीश मिश्र पहुंचे। मुख्यमंत्री व सतीश मिश्र ने साथ ही नतीजे देखें। जैसे-जैसे घड़ी की सूइयां बढ़ रही थीं बसपा का सूपड़ा साफ होता नजर आ रहा था।

शुरुआती रुझानों में बसपा तीसरे नंबर पर दिखी लेकिन धीरे-धीरे बढ़त बनाई और नतीजों के रुझानों से तस्वीर साफ होती गई। पार्टी कार्यालय पर हलचल की जो उम्मीद थी वह भी खत्म होती गई। रुझानों को देखते हुए पार्टी का कोई नेता न तो बसपा कार्यालय पहुंचा और न ही मुख्यमंत्री मायावती के घर पर ही। बसपा के जो नेताओं ने चुनाव नहीं लड़ा उन्होंने लखनऊ में घर पर ही सीटों का हाल लिया। जहां पार्टी सीटें ठीक-ठाक बढ़ती दिखी वहां क्षेत्रवार सीटें समझने कोशिश की गई। घड़ी की सूइयां ज्यों-ज्यों आगे बढ़ी बसपा अपनी सीटें खोती दिखी। मायावती कब इस्तीफा देंगी, यह कयास लगने लगे।

उधर, सचिवालय में भी भारी सन्नाटा पसरा रहा। ज्यादातर अफसर 11 बजे तक दफ्तर नहीं पहुंचे। चर्चा रही कि नई सरकार आ रही है। बसपा का पत्ता साफ होते देख ब्यूरोक्रेसी में भी हलचल दिखी। बेचैनी की चादर ओढ़े दिन ढल गया।

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