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बसपा का सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला फेल

मथुरा। निज संवाददाता। जनपद में बहुजन समाज पार्टी का सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला फेल हो गया। चुनाव परिणाम इसी की गवाही दे रहे हैं। पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में मुख्यमंत्री सहित वरिष्ठ नेताओं ने सभाएं की थीं। सोशल इंजीनियरिंग के माध्यम से प्रदेश की सत्ता में आई बसपा ने पुन: इसी प्रक्रिया को अपनाया। दलित वर्ग हमेशा पार्टी के साथ रहा है।

पार्टी को और मजबूत करने के लिए भाईचारा कमेटियों का गठन कर पदाधिकारी नियुक्त किए गए। जाट, ब्राह्मण, बघेल, क्षत्रिय, यादव, वैश्य, मुस्लिम, सैनी, प्रजापति, कायस्थ आदि भाईचारा कमेटियां बना पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे चुनाव में पार्टी प्रत्याशी विजयी हो सकें।

चुनाव मैदान में मांट विधानसभा से ठाकुर रामापाल सिंह, छाता से लक्ष्मी नारायण मंत्री, मथुरा-वृन्दावन से पुष्पा शर्मा, बल्देव से चन्द्रभान सिंह उर्फ पप्पू एवं गोवर्धन से राजकुमार रावत को उतारा। जीत के लिए मुख्यमंत्री मायावती,कैबिनेट मंत्री नसीमुद्म्दीन सिद्दीकी, प्रदेश के मंत्री जयवीर सिंह, वरिष्ठ नेता सतीश मिश्रा, एसपी सिंह बघेल आदि वरिष्ठ नेताओं की सभाएं कराई गईं।

पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में की गई संभाएं एवं नेताओं द्वारा किए गए जनसंपर्क का रिजल्ट इसके विपरीत आया है। इससे स्पष्ट हो गया है कि पार्टी का सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला इस चुनाव में सफल नहीं हो पाया।

जनपद की गोवर्धन विस सीट पर बसपा की जीत हुई है। यहां से राजकुमार रावत की जीत हुई है। इसका कारण उनके द्वारा क्षेत्र में कराए गए विकास कार्य एवं स्वयं की छवि बताई गई। अन्य चारों सीटें बसपा हार गई है।

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  • Web Title:बसपा का सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला फेल