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सपा ने किया सभी का ‘सफाया’

विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जनपद में शानदार प्रदर्शन किया है। सपा ने यहां चारों सीटों पर जीत हासिल की है। एटा शहर को छोड़कर सभी जगह सपा उम्मीदवारों ने बड़ी जीत हासिल की। भाजपा ने अपनी दोनों सीट गंवा दी हैं। बसपा भी अपनी अलीगंज की सीट को नहीं बचा पाई है। यहां स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी को करारी हार का सामना करना पड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पार्टी जेकेपी को भी जीत नसीब नहीं हुई। 

मंगलवार सुबह भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आठ बजे मतगणना का श्रीगणेश हुआ। सबसे हॉट सीट कही जाने वाली अलींगंज विधान सभा क्षेत्र से बसपा के दिग्गज नेता व पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी डॉ. संघमित्र मौर्य को सपा के पूर्व विधायक रामेश्वर यादव ने 26021 वोटों से हरा दिया। रामेश्वर सिंह को रिकार्ड 91141 वोट मिले।

बसपा को 65120 वोट मिले। तीसरे नंबर पर जेकेपी के प्रो. नीरज मिश्र रहे। उनको 24535 वोट मिले। यहाँ भाजपा को मात्र 1947 और कांग्रेस को 8160 वोट मिले। इस सीट पर दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। बसपा ने पूर्व मंत्री और यहां से विधायक अवधपाल सिंह यादव की टिकट काटकर संघमित्र को चुनाव मैदान में उतारा था।

परसीमन के बाद अस्तित्व में आई मारहरा विधान सभा सीट पर निधौली कलां से सपा के विधायक अमित गौरव यादव टीटू ने जेकेपी के उम्मीदवार बीरेन्द्र सिंह को 22256 वोटों से हरा दिया। टीटू को 61827 वोट मिले। बीरेन्द्र सिंह 39571 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे। तीसरे नंबर पर बसपा के नन्हू सिंह वर्मा रहे। उनको 30340 वोट मिले।

इस सीट पर भी भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गईं। भाजपा के विपिन वर्मा डेविड को मात्र 7562 वोट मिले। कांग्रेस के चोब सिंह बघेल को 7360 वोट ही मिल सके। इस सीट पर बीरेन्द्र सिंह लोधी ने शुरू में तो साइकिल की हवा निकाल दी लेकिन वह सूरज के परवान चढ़ते ही पीछे होते रहे।

जलेसर विधान सभा सीट पर भी साइकिल ने फर्राटा भरा। यहां सपा के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। यहां भी सपा प्रत्याशी और रामजीलाल के पुत्र रणजीत सुमन ने बसपा प्रत्याशी ओमप्रकाश दलित को भारी मतों से हरा दिया। सुमन ने भाजपा का गढ़ कही जाने वाली सीट पर 52901 वोट हासिल किए।

बसपा के ओमप्रकाश दलित 30912 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे। कांग्रेस के उम्मीदवार व पूर्व विधायक अनार सिंह दिवाकर 20164 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे। वहीं भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। निवर्तमान विधायक कुबेर सिंह अगरिया की पत्नी और पूर्व विधायक मिथलेश अगरिया को मात्र 19359 वोट से संतोष करना पड़ा। एटा में सबसे अधिक बार इसी सीट पर जीती भाजपा इस बार चौथे नंबर पर रही।

सबसे रोचक मुकाबला एटा सदर सीट पर हुआ। यहाँ सपा के आशीष यादव ने मात्र 3244 वोट से बसपा के उम्मीदवार गजेन्द्र चौहान उर्फ बबलू को हरा दिया। आशीष को 39282 वोट मिले। गजेन्द्र को 36038 वोट मिले। वहीं भाजपा के विधायक प्रजापालन वर्मा अंतिम चरणों में पिछड़ गए और तीसरे नंबर पर रहे। उनको 32857 वोट मिले।

जिले में कांग्रेस ने इसी सीट पर दम दिखाया। यहां कांग्रेस प्रत्याशी व पूर्व विधायक शिशुपाल सिंह यादव 28430 वोट पाकर चौथे नंबर पर रहे। यह सीट भाजपा की गढ़ कही जाती है। भाजपा के कब्जे वाली सीट पर सपा का झंडा बुलंद हो गया। यहां सबसे अधिक घमासान मचा।

इस सीट पर कई चक्रों की गणना में बसपा और भाजपा में करीब दो सौ वोट से शह मात का खेल चलता रहा। लेकिन दो बजे जैसे ही 19 वां चरण शुरू हुआ बाजी एकदम पलट गई। चौथे नंबर पर चल रहे सपा प्रत्याशी करीब 2000 वोट से आगे हो गए। दूसरे नंबर पर 29150 वोट पाकर बसपा प्रत्याशी बबलू थे।

भाजपा विधायक प्रजापालन वर्मा 28082 मत पाकर प्रजापालन वर्मा तीसरे नंबर पर थे। 18 वें चक्र में आशू एक वोट से आगे थे। दूसरे नंबर पर भाजपा थी। भाजपा से 80 वोट पीछे थे बसपा के प्रत्याशी गजेन्द्र चौहान बबलू। लेकिन अंतिम निर्णय में साइकिल ने बाजी मार ली।

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