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हार के बाद जिलाध्यक्षों के नम्बर हुए ‘नोट रिचेबल’

विधान सभा चुनाव में सपा के हाथों करारी हार ङोलने वाली विरोधी पार्टियों के जिलाध्यक्षों के नम्बर ‘नोट रिचेबल’ हो गया। अधिकतर जिलाध्यक्षों से असल में हार के कारणों का पता नहीं चल सका। बस, बसपा जिलाध्यक्ष ने एटा की चारों सीटों पर मिली हार के कारणों को बताया। अलीगंज, एटा सदर, मारहरा और जलेसर विधान सभा सीटों पर सपाई प्रत्याशियों को ऐतिहासिक जीत मिली।

साल 2002 के बाद यह पहला मौका है, जबकि चारों सीटों पर सपाई प्रत्याशियों ने कब्जा जमाया। जलेसर और एटा सदर में भाजपा को करारी हार मिली। वहीं अलीगंज में बसपा से सीट छीनकर रामेश्वर सिंह यादव ने विजय हासिल की। बसपा के जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार बुधकर ने बताया कि जनता का निर्णय है, समीक्षा के बाद ही हार के कारणों का पता चलेगा। वहीं उन्होंने कहा कि बसपा का मिशन सत्ता तक ही नहीं रहता। पार्टी का उद्देश्य समता मूलक समाज की स्थापना करना है, जोकि जारी रहेगा।

भाजपा जिलाध्यक्ष पंकज गुप्ता से संपर्क किया गया तो उनका फोन नम्बर ‘नोट रिचेबल’ आया। जबकि कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज गुप्ता का फोन उठा ही नहीं। कल्याण फैक्टर बेअसर क्यों रहा, जब इसका जवाब जानने के लिए जनक्रांति पार्टी के जिलाध्यक्ष से जब संपर्क किया गया तो उनका मोबाइल नम्बर नहीं उठा।

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