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घनघनाते फोन और रुझान की जिज्ञासा

सुबह के 7 बजते-बजते गाड़ियों की आमद शुरू। ओएसडी चंद्रमोहन मिश्र और अतीक अहमद की गाड़ियां आकर रुकी। दोनों लम्बे-लम्बे डग भरते कंट्रोल रूम में। चंद मिनट बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा और अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी मृत्युजंय कुमार नारायण भी फोन पर बात करते हुए अंदर घुसे। साढ़े सात बजे तक गतिविधियां तेज होने लगी। कंट्रोल रूम के 14 फोन घनघनाने लगे। कोई जिलों से पता करता कि कहीं कोई दिक्कत तो नहीं कि फोन आने शुरू हो गए कि पोस्टल बैलेट व ईवीएम की गिनती हो गई। इसके बाद घंटियां बजती ही रहीं।

कंट्रोल रूम में बड़ी-सी स्क्रीन पर वेबसाइट पर दिखाए जा रहे ट्रेंड्स को प्रोजेक्टर की मदद से दिखाया जा रहा है। काल सेंटर में भी 10-12 युवा तैनात। फोन पर फोन, सवाल-दर-सवाल आते रहे। लखनऊ पूर्वी मे कौन जीत रहा? मुख्तार अंसारी जीतेंगे क्या जैसे सवालों से काल सेंटर जूझता रहा। इस बीच कंट्रोल रूम में जिलों से शिकायतें भी कि राउंडवार फीडिंग धीमी चल रही है। ओएसडी अतीक अहमद ने कमान संभाली। महोबा में पूछा-फीडिंग धीमी क्यों?

रमाबाई नगर में भी अधिकारियों ने जाना कि क्या दिक्कत है। साढ़े आठ बजते-बजते चुनावी रुझान आने लगे। चुनाव आयोग के कंट्रोल रूम में भी तेजी आती गई। लोगों में भी हलचल बढ़ी। 40-45 लोग जानने के लिए बेचैन कि कहीं कोई दिक्कत तो नहीं, सब जगह ठीक-ठाक है या नहीं। उमेश सिन्हा भी बीच-बीच में कंट्रोल रूम में आते। जायजा लेते। फोन कानों से लगा। आयोग के दफ्तर में कई जगह टीवी पर राउंडवार पोजीशन दिखाई जा रही। तभी फोन आने लगे-बाराबंकी के रुझानों पर रोक क्यों लगीं? अधिकारी हैरान-परेशान।

बाराबंकी में बात की तो पता चला कि कोई तकनीकि दिक्कत है जिसके चलते रुझान दिख नहीं रहे और इस बीच किसी चैनल पर खबर चल गई कि बाराबंकी के रुझानों पर रोक लगी। अधिकारी दिक्कतों को दूर करने में लग गए। समय बढ़ता जा रहा था। मतगणना की एनालिसिस के लिए यूपीडेस्को के चीफ इंचार्ज आर एस सिंह भी दफ्तर में घुस चुके। सारी सीटों का रुझान साफ दिखने लगा। यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा, बीच में कोई ब्रेक नहीं।

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