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टप्पल कांड से आहत किसानों ने बसपा को सिखाया सबक

जिले के नतीजों पर तमाम कारणों के साथ ही बहुचर्चित टप्पल कांड भी खासा प्रभावी रहा। सरकार के रवैये से आहत किसानों ने जहां बसपा के खिलाफ मत देकर उसके प्रत्याशी को रिकार्ड मतों से हराकर सबक सिखाया, वहीं राजनाथ सिंह को भी कोई भाव नहीं दिया। हालांकि कांग्रेस समर्थित रोलद प्रत्याशी को जिताकर जरूर राहुल गांधी से टप्पल के किसान सहमत दिखाई दिए।

हरियाणा सीमा से सटे टप्पल में 14 अगस्त 10 का काला दिन वहां के किसान भूल नहीं पाए। नोएडा से लेकर आगरा तक बनाए जा रहे यमुना एक्सप्रेस वे के लिए वहां के ढाई हजार से अधिक किसानों की जमीन बसपा सरकार ने अधिग्रहण की थी। हालांकि किसान जमीन देना चाहते थे, लेकिन वह नोएडा के बराबर जमीन का मुआवजा मांग रहे थे।

इसी मुद्दे को लेकर वह टप्पल क्षेत्र के गांव जिकरपुर में धरने पर बैठे थे। तभी पुलिस ने हमला कर दिया। इस दौरान तीन किसानों की मौत हो गई, जबकि पीएसी का कंपनी कमांडर भी मौके पर ही मारा गया था। इसके बाद किसान नेता मनवीर सिंह तेवतिया समेत दो हजार किसानों केखिलाफ मुकदमे कायम किए गए थे। उस दौरान जहां बसपा की तरफ से कोई बड़ा नेता किसानों के आंसू पोंछने नहीं पहुंचा, वहीं कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी और भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह भी किसानों की बात सुनने गए थे।

विधान सभा चुनावों में संभावना थी कि टप्पल कांड का असर जरूर पड़ेगा। हिन्दुस्तान ने इसे प्रकाशित भी किया था। अब चुनाव केपरिणाम आए हैं तो टप्पल कांड का असर साफ दिखाई दिया। खैर (सुरक्षित) सीट से रालोद प्रत्याशी भगवती प्रसाद सूर्यवंशी के सिर पर जीत का सेहरा बांध दिया। जबकि बसपा के प्रत्याशी के तौर पर वहां से चुनाव मैदान में कूदी पूर्व मत्री महेन्द्र सिंह की पत्नी राजरानी को करारी शिकस्त दी है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि राजरानी को 38774 रिकाड मतों स पराजित करा दिया।

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