DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शहर की हर गली मुहल्लों में चुनाव परिणामों की चर्चा

होली आने में एक दिन और है लेकिन मंगलवार को पूरा शहर चुनावी रंग से सराबोर दिखा। रंगो, मिठाई व पिचकारी की दुकानों में भी सिर्फ इस बात की चर्चा थी कि कौन बनाएगा सूबे में सरकार ? दो माह से चल रही जोर मशक्कत और पब्लिक से किए गए तमाम वादों में किसके वादों और दावों ने गहरी छाप छोड़ी हर कोई यह जानना चाह रहा था।

दावेदारों की तेज होती धड़कनों और पुराने धुरंधरों की दांव पर लगी प्रतिष्ठा के बीच मंगलवार को पूरे शहर का माहौल कुछ खास रहा। अंधेरे मुंह ही माथे पर तिलक लगा विजयश्री की कामना के साथ प्रत्याशी धनीपुर मंडी के लिए निकल लिये। आने वाले परिणाम की टेंशन उनके चेहरों से झलक रही थी। नर्वस होने पर हथेलियों को रगड़ते तो कभी समर्थकों को कुछ समझाते भी जाते। दोराहे पर खड़ी किस्मत को चुनावी ट्रैफिक सिगनल के हरे होने के इंतजार में हर मिनट पहाड़ सा लग रहा था।

सुबह आठ बजे
धनीपुर मंडी के बाहर पुलिस फोर्स के अलावा नेताजी के करीबियों ने जुटना शुरू कर दिया था। इनका राजनीति से सीधे तो कोई सरोकार न था पर नेताजी के साथ रहने की आदत पड़ चु़की है। तीन-चार लोगों की टुकड़ियां मंडी के बाहर किश्तों में जमा थीं और नतीजों का हवाई आंकलन कर रही थीं। कुछ लोग दुआ सलाम करते लोगों से आशीर्वाद मांग रहे थे।

सुबह आठ बजकर बीस मिनट
जीटी रोड के इतर शहर में ट्रैफिक का ज्यादा दबाव नहीं था। लोग अपने घरों में और दुकानों में लगे टीवी सेट पर चुनाव के दिलचस्प आंकड़े जानने में मशगूल हो चुके थे। हर बढ़त की खबर के साथ एक बहस का दौर शुरू होता और अगले रुझान के आने तक उस पर लगातार चर्चा बनी रहती। इस बीच कुछ लोग ऑफिस जाने की जल्दी में सड़कों पर नजर आ रहे थे।

दिल्ली जाने के लिए घर से निकले महेन्द्र वाष्ण्रेय कहते हैं कि कोई जीते हमें क्या। अखबारों में एग्जिट पोल के बारे में पढ़ा, इससे ज्यादा मुङो क्या मतलब? मेरे लिए कोई कुछ नहीं करेगा।

अपने खाली रिक्शे को लेकर मीनाक्षी पुल को पार करते गुमनाम से छोटू को इस मतगणना के बारे में पता नहीं। वह तो बस कोई गीत गुनगुनाने में अपना पूरा ध्यान लगाये थे। पूछने पर बोला कि 22 साल में मुझे किसी ने एक नाम देने की भी जहमत न उठाई। मुङो तो इस हार-जीत से कोई मतलब नहीं।

सुबह नौ बजे
फर्राटा भरते वाहनों की रफ्तार थोड़ी धीमी हो गई है, मतगणना की वजह से जाम में फंसे लोग व्यवस्था को कोसते दिखे। क्या करना है कोई पार्टी जीत गई तो क्या,अलीगढ़ ऐसा ही रहेगा, कोई भी नेता आज तक जाम का विकल्प नहीं दे पाया। नौरंगाबाद में एक दुकान में टीवी सेट पर आ रहे नतीजों को देखने के लिए लोग सड़क तक लाइन लगाये खड़े थे। पास स्थित चाय की दुकान में चुस्कियों के साथ नतीजों के बारे में बहस कर रहे थे।

सुबह साढ़े नौ बजे
अचलताल पर मोची की दुकान पर खड़े युवक से जब जीत-हार की बात की तो वह बोला इस बार जनता ने काफी अच्छा मतदान किया है। शायद बढ़िया नेता आ जाए जो हमें भी रोजगार दिलवाये। वहीं स्टेशनरी की दुकान पर खड़े रोहित शर्मा कहते हैं कि बेरोजगारी का फार्म भरने के लिए वेबसाइट पूछने आया हूं। सारी पार्टियों की सरकारें आई पर हमारी हालत वही है।

सुबह दस बजे
हाथरस अड्डे पर लगे जाम में फंसे लोग होली के रंग में भीगे नजर आये। बीच-बीच में चुनाव नतीजों को लेकर चर्चा होती। किसी ने कहा कि इस बार शहर और कोल से बढ़िया आदमी जीत रहे हैं तो दूसरे ने मजाक उड़ाते हुए कह दिया कि क्यों तुमको कुछ मिल जायेगा? इस पर जवाब आया कि इस बार तो वादे निभाने पड़ेंगे। हम लोग बेवकूफ नहीं हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:शहर की हर गली मुहल्लों में चुनाव परिणामों की चर्चा