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बिहार में खेसारी के व्यवसाय से प्रतिबंध हटा

राज्य सरकार ने सूबे में खेसारी के व्यवसाय पर लगा प्रतिबंध हटा लिया है। किसान अब खेसारी के उत्पादन के साथ उसका व्यापार भी कर सकते हैं। सरकार ने नगर निकाय और पंचायत निकायों के साथ सर्वशिक्षा अभियान के लिए राशि की व्यवस्था कर दी है। एक डॉक्टर और एक इंजीनियर को बर्खास्त करने का फैसला भी हुआ।

मंगलवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में खेसारी पर से प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया गया। इस फेसले से राज्य में दाल की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी। खेसारी के व्यवसाय पर करीब तीस साल पहले देशभर में प्रतिबंध लगाया गया था।

उस समय जारी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि इस दाल के खाने से लकवा की बीमारी होती है। लेकिन, इसके बाद कई रिपोर्टो में इस तर्क को निराधार बताया गया। लिहाजा कई राज्यों ने खेसारी से प्रतितबंध हटा लिया, लेकिन बिहार में यह जारी था।

उधर, राज्य कैबिनेट के फैसले के अनुसार नगर निकायों और पंचायत निकायों को राशि चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में दी गई है। तीन सौ करोड़ की इस राशि में जिला परिषद के कर्मचारियों के वेतन भुगतान के हेड में भी पैसा दिया गया है। इससे इन कर्मचारियों के वेतन भुगतान का मामला सुलझ जाएगा।

सर्वशिक्षा अभियान के लिए पांच सौ करोड़ रुपये की व्यवस्था हुई है। कैबिनेट ने जिन दो अधिकारियों को बर्खास्त करने का फैसला किया है उनमें एक डॉक्टर के अलावा पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर अरुण कुमार सिन्हा भी शामिल है। सिन्हा पर पहली पत्नी की गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के कारण एक नाबालिग लड़की से दूसरी शादी रचाने का आरोप है।

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