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जालसाज गिरफ्तार, शिक्षा मंत्री से आया था पैरवी कराने

सुप्रीम कोर्ट के जज का भांजा बनकर बिहार के शिक्षा मंत्री से टीईटी में पैरवी कराने पहुंचना एक जालसाज को महंगा पड़ गया। शिक्षा मंत्री को उस पर संदेह हो गया और उन्होंने पूछताछ का निर्देश प्राथमिक शिक्षा निदेशक को दिया। मामला खुला कि जज साहब का कोई भांजा ही नहीं है। जालसाज को सचिवालय थाने के हवाले किया गया और उसके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई।

हुआ यह कि पांच-छह दिन पहले पीके शाही को एक फोन आया। उनसे कहा गया, ‘जस्टिस पीएस ठाकुर बोल रहा हूं, सुप्रीमकोर्ट से। मेरे भांजे और भांजी ने आपके यहां टीईटी दिया है। उसको देख लीजिएगा, क्वालिफाई करा दीजिएगा। मैं उसे पटना भेज रहा हूं।’ इस फोन के दो दिन बाद फिर श्री शाही के पास फोन आया। सामने वाले ने कहा, ‘पीएस ठाकुर का भांजा बोल रहा हूं। आपसे मिलना है।’

शिक्षा मंत्री ने उन्हें मंगलवार को विभाग में सुबह दस बजे आकर मिलने को कहा। तय समय के मुताबिक एक युवक उनसे मिलने आया। थोड़ी सी बातचीत में ही श्री शाही को उस पर शक हो गया। उन्होंने पीएस ठाकुर को तत्काल फोन लगाया। सारी बात जानने के बाद श्री ठाकुर ने भांजे को उनके पास भेजने से इनकार कर दिया। साथ ही यह कहा कि वह तो कश्मीर के हैं। उनका कोई भांजा नहीं है। इसके बाद मंत्री ने युवक को प्राथमिक शिक्षा निदेशक आशुतोष के हवाले किया।

निदेशक की सूचना पर सचिवालय पुलिस पहुंच गई। प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने बताया कि लड़के ने अपना नाम सुधीर कुमार बताया है। वह मुजफ्फरपुर के पारू प्रखंड के गणेश प्रसाद सिन्हा का पुत्र है। उसके पास से टीईटी के दो एडमिट कार्ड मिले हैं। एक उसका और दूसरा उसकी बहन का है।

निदेशक ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सिम बदलकर उसने मंत्री जी को खुद पीएस ठाकुर बनकर फोन किया। उसके पास डबल सिम का मोबाइल, एक एयरसेल और एक बीएसएनएल का सिमकार्ड मिला है।

एक बोडाफोन का भी अतिरिक्त सिम उसके पास मिला। मोबाइल सेट की जांच में सामने आया कि उसने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को भी फोन किया है। सुधीर के पास एटीएम कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और टेलीफोन डायरेक्ट्री भी बरामद हुई है, जिसमें कई अधिकारियों के नंबर हैं।

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