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रेशम एवं वस्त्र संस्थान का हो रहा आधुनिकीकरण

सूबे की उद्योग मंत्री रेणु कुमारी ने मंगलवार को विधान परिषद में बताया कि भागलपुर स्थित बिहार रेशम एवं वस्त्र संस्थान के आधुनिकीकरण की परियोजना पर तेजी से काम हो रहा है।

हरेन्द्र प्रताप पाण्डेय के ध्यानाकर्षण के जवाब में मंत्री ने कहा कि नाथनगर स्थित बिहार रेशम एवं वस्त्र संस्थान में वर्ष 1978 से बीएससी सिल्क टेक (सेरिकल्चर, सिल्क विभिंग, सिल्क डाइंग एवं प्रिंटिंग) नाम से चार साल का तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किया गया था।

यह संस्थान भागलपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध था। वर्ष 1993 में एआईसीटीई नई दिल्ली की टीम ने संस्थान का स्थल निरीक्षण किया और प्रस्तावित बीटेक(सिल्क) एवं बी.टेक (टेक्सटाइल) कोर्स को सशर्त मान्यता दी गई। यह शर्त रखी गई थी कि एआईसीटीई (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) मानदंड के अनुसार स्थल फैकेल्टी, उपकरण, पुस्तकालय, प्रयोगशाला आधारभूत संरचना विकसित किया जाए।

इसके अलावा प्रत्येक संकाय में कम से कम एक प्रोफेसर एवं दो व्याख्याता का पदस्थापन करने को कहा गया था। लेकिन, संस्थान इन शर्तो को पूरा नहीं कर पाया और वर्ष 1994 के प्रभाव से संबंधित पाठ्यक्रम का पठन-पाठन अगले आदेश तक स्थगित कर देना पड़ा। लेकिन संस्थान में उपलब्ध संसाधन अन्य पाठ्यक्रम के संचालन के अनुरूप था।

लिहाजा इसके उपयोग के लिए सरकार ने वर्ष 2005 से वहां सिल्क टेक का दो वर्षीय वोकेशनल कोर्स शुरू किया, जो अभी चल रहा है। इस कोर्स के लिए छात्रों का नामांकन भी हो रहा है। इसके पहले नरेन्द्र प्रसाद सिंह और रामकिशोर सिंह ने भी मंत्री से पूछा था कि क्या सरकार उस संस्थान में बीटेक का कोर्स फिर से शुरू करेगी।

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