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हरियाली फैलाने के लिए कई स्तरों पर तैयारी

विधान परिषद में मंगलवार को वन एवं पर्यावरण विभाग पर वाद-विवाद में सरकार की तरफ से उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने जवाब दिया और कहा कि सूबे में 15 फीसदी हरियाली बढ़ाने के लिए प्रयास होंगे।

वर्ष 2012-13 के लिए विभागीय बजट को बढ़ाकर 100 करोड़ किया गया है। कई नई योजनाएं भी शुरू की जा रही हैं। नौ अगस्त इस बार माध्यमिक स्कूलों के अलावा उच्च माध्यमिक और प्रारंभिक स्कूलों में भी पृथ्वी दिवस मनाया जाएगा। बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के लिए 10 सूत्री संकल्प दिलवाए जाएंगे।

मोदी ने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर पेड़ों को भी रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा शुरू की गई है। यह किसी धर्म से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि पेड़ों की रक्षा करने की मुहिम है। पिछले वर्ष 20 लाख 45 हजार पौधे मुफ्त बांटे गए थे, इस बार इस संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी। हरियाली बढ़ाने के लिए अच्छे और उन्नत किस्म के पौधों की सबसे ज्यादा आवश्यकता पड़ेगी।

इसके लिए विभाग आठ जिलों बेतिया, मुजफ्फरपुर, राजगीर, बक्सर, कटिहार, डिहरी, बांका और मोतिहारी में हाईटेक नर्सरी स्थापित करेगा। 20 हजार की क्षमता वाले निजी नर्सरी भी स्थापित किए जाएंगे। इसमें तैयार होने वाले सभी पौधों को सरकार खरीदेगी।

किसानों को नर्सरी लगाने के लिए हर तरह से मदद दी जाएगी। किसान इसे व्यवसाय के रूप में विकसित कर सकते हैं। वनों के बाहर पौधों की संख्या बढ़ाने के लिए किसान फसल के साथ पॉपुलर पौधे लगा सकते हैं। बिहार ‘हरियाली मिशन’ के तहत इसकी पूरी व्यवस्था की गई है। पौधरोपण कृषि रोडमैप में भी शामिल हुआ है।

दुर्गावती जलाशय परियोजना में उपयोग हुई वनभूमि के बदले विभाग को कैम्पा फंड के जरिए 314 करोड़ रुपए मिले हैं। इसी फंड में फरवरी 2012 तक 171 करोड़ प्राप्त हुए हैं। इस फंड के 10 फीसदी रुपए पौधरोपण पर खर्च होंगे। वाल्मीकिनगर व्याघ्र परियोजना को इस वर्ष जाड़े के मौसम से टूरिस्ट स्पॉट के रूप में शुरू कर दिया जायेगा।

नए रूप में शुरू होगी योजना, मनरेगा के तहत पौधरोपण
मोदी ने मुख्यमंत्री छात्र वृक्षारोपण योजना को नए रूप में लांच करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि योजना चार साल चलने के बाद इसमें कुछ कमी दिखी। अब पेड़ लगाने के लिए किसी छात्र के बजाय पांच छात्रों का समूह बनाकर रुपए दिए जाएंगे। पेड़ सार्वजनिक स्थल पर लगाए जाएंगे और पेड़ लगाने वाले पांच बच्चे इसके गारेंटर बनेंगे।

उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत भी फलदार पेड़ों को लगवाए जाएंगे। प्रत्येक 200 पेड़ों की देखभाल की जिम्मेवारी चार परिवारों को दी जाएगी। इसमें दलित, महादलित और बीपीएल स्तर के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। पांच वर्ष तक इन परिवारों को मनरेगा के तहत निर्धारित मजदूरी मिलेगी। पटवन के लिए चापाकल विभाग लगाकर देगा। ये पौधरोपण मलीन बस्ती के आसपास कराए जाएंगे।

प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान, नीलगाय को मारना जायज
मोदी ने कहा कि वनकर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए गया में बिहार वन अकादमी की स्थापना होगी। पटना में वन विभाग का अलग मुख्यालय बनाया जाएगा। जिन जिलों में नीलगाय से किसानों की फसलें ज्यादा बर्बाद होने की शिकायत मिली हैं, वहां इन्हें मारने की अनुमति दे दी गई है। सभी जिलाधिकारी को वनप्राणी संरक्षक मनोनीत किया गया है। नीलगाय को मारने से पहले लोगों को डीएम या एसडीओ से अनुमति लेनी पड़ेगी।

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