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कृपया मिलावट से परहेज करें

रंगबाजी शुरू हो चुकी थी। मौलाना अपनी दाढ़ी पर सरदारी ढाठे की तरह पॉलीथीन लपेटे चले आ रहे थे। टकराते ही बोले, ‘भाई मियां, अब इस उम्र में दाढ़ी लाल-पीली कराना मुनासिब नहीं। बाकी त्योहार हम सबका है। रंग डालो, यार। खुदा की बरकत है कि सारी खींचतान और महंगाई के बावजूद होली का शवाब और जलवे बाकी हैं। न सही मलमल का थान, रूमाल भर तो बाकी बची ही है। दो-दो गुझिया, पापड़ मुंह तक पहुंच जाएं, यही अल्लाह की नेमत है। वरना होली तो होली। अपनी जवानी में देखा रंगों का सैलाब आज भी नजरों के सामने है।’

मुंह में दो इलायचियां झोंककर गुलाल झाड़ते हुए वह बोले, ‘अमां मियां, इधर अबीर-गुलाल अच्छा उछल रहा है, उधर रंग-बिरंगी न्यूजें। छापा हैगा कि लाखों का मिलावटी खोया पकड़ा गया। खोये वाले तड़ से खो गए... पतली गली से। मुस्तैद पुलिस डंडे फटकारती रह गई। कहते हैं कि यह खोया अगर पेट में चला जाता, तो हजारों खुद गुझिया होकर रह गए होते। अब आप थोड़ा गहरे उतरो भाई मियां। फ्रॉम टॉप टू बॉटम मिलावट तो हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। परंपरा है, संस्कार है। होली बाद कुछ सूबों में जो सरकारें बनेंगी, वे भी खुदा के फजल से मिलावटी ही होंगी, शुद्ध नहीं। छुटभैये गुझिया में इलायची जैसे घुस लेंगे। दस इधर से, दस उधर से। समर्थन लो...कुरसी दो। जिन्हें चुनाव से पहले पानी पीकर कोसा, उन्हीं के गले में बाहें डाल देंगे। आ जा मेरी गाड़ी में बैठ जा, दस मंत्री पद दे देंगे। लो जी बहुमत तैयार, दिलाओ शपथ। बाद की लप्पा-डुग्गी बाद में देखेंगे।’

न जाने किस दवा की एक गोली गुटककर मौलाना बोले, ‘मिलावट से परहेज कैसा मियां? क्रिकेट की आईपीएल टीम से लेकर काली मिर्च और पिसे धनिये तक में मिलावट की जय है। जो कोट आप पहने हो, उस तक में मिलावट है। अपर ऊनी, अस्तर सूती। मिलावट से गरमाहट बनी रहती है। सरकार में मिलावट हो, तो भावी जूतम-पैजार के चांसेज बने रहते हैं। चुनांचे हम तो कहें कि मिलावट से एक ग्रेस बनी रहती है। भाड़ में गया आम आदमी और उसकी सेहत। कैरी ऑन मुन्ना भाई। चलिए, लौंग-अदरक-दालचीनी की मिलावट वाली चाय पिलाते हैं। कम ऑन।’
के.पी. सक्सेना

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