DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

धर्मगुरु बनने की लड़ाई

तिब्बती बौद्ध धर्म में दलाई लामा के बाद करमापा लामा का पद दूसरा सबसे प्रभावशाली पद है। अब करमापा के दो-दो उत्तराधिकारी इस पद के लिए आपस में लड़ रहे हैं। लड़ाई में कानून का भी सहारा लिया जा रहा है। थाये दोर्जी सिर्फ 18 महीने के थे, जब उन्होंने लोगों से कहना शुरू किया कि वह करमापा लामा हैं, जिनका पुनर्जन्म हुआ है। अब वह 28 साल के हैं और अपनी आध्यात्मिक खोज के साथ करमापा के नाम के लिए एक जटिल विवाद में फंस गए हैं।

थाये दोर्जी को चुनौती दे रहे हैं उर्गयेन त्रिनली, जो 26 साल के हैं और उनके अनुयायी उन्हें ही करमापा मानते हैं। इन दोनों के अलावा करमापा विवाद में दलाई लामा, चीन सरकार, भारत की शीर्ष अदालत और एक प्राचीन व समृद्ध तिब्बती मठ भी शामिल हैं। दरअसल, सिक्किम के रूमटेक मठ में करीब 1.5 अरब डॉलर के मूल्य का खजाना रखा है और इसमें सबसे कीमती माना जाता है ‘काला ताज’, जो कई दशकों से छिपाकर रखा गया है। करमापा पद के दोनों उम्मीदवार अब भारत में रहते हैं।

त्रिनली का परिवार साल 2000 में तिब्बत से भागकर भारत आया, जबकि दोर्जी 1993 से ही भारत में हैं। दोनों में से उर्गयेन त्रिनली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा मशहूर हैं। चीन की सरकार और दलाई लामा, दोनों ने त्रिनली को करमापा के तौर पर मान्यता दे दी है। बहरहाल, करमापा की लड़ाई तिब्बत सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। दलाई लामा के बाद हो सकता है कि चीन सरकार अपनी तरफ से धार्मिक नेता का एलान कर दे।
डायचे वेले वेब पोर्टल से

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:धर्मगुरु बनने की लड़ाई