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बहुमत का मतलब

जब जनता को सपने दिखाए जाते हैं और फिर वे सपने तोड़े जाते हैं, तो उसकी आह का बोझ न राजनेता उठा पाते हैं और न सियासी पार्टियां उसे झेल पाती हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का नतीजा उन सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए सबक है, जो सत्ता के मद में अंधी होकर जनता के सपनों को तोड़ती हैं, उन्हें नाउम्मीद करती हैं। आखिर लोकतंत्र में जनादेश से भटका तंत्र किस काम का? बहुमत का मतलब है कि पूरे पांच साल तक जनता की अपेक्षाओं पर सरकार सौ फीसदी खरी उतरे। अगर वह ऐसा नहीं करती, तो अगला जनादेश यकीनन सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में नहीं आएगा। पुरानी सरकार जाएगी और नई आएगी। अगर बहुमत का मतलब नई सरकार भी नहीं समझती है, तो उसका हश्र भी पुरानी सरकार जैसा ही हो सकता है।
विनोद आहूजा, कीर्तिनगर, दिल्ली

केमिकल रंगों से बचकर
होली पर केमिकल रंगों के प्रयोग से बचने की सलाह कई साल पुरानी हो चली है। बावजूद इसके इनकी मांग में साल-दर-साल बढ़ोतरी देखी गई है। जाहिर है, हमारी जागरूकता में कमी है। दरअसल, आम लोगों को केमिकल रंगों से होने वाले नुकसानों को बारे में या तो जानकारी नहीं है या फिर सीमित ज्ञान है। हर साल होली के मौके पर हजारों लोगों को इससे एलर्जी हो जाती है। कई लोग अपनी आंखों की रोशनी तक गंवा बैठते हैं। उधर केमिकल रंग बनाने वाली कंपनियां कहती हैं कि हमने तो पैकेट पर इसके नुकसान के बारे में बताया था और इनके सावधानीपूर्वक प्रयोग की हिदायतें लिखी हुई थीं, फिर भी लोगों ने गलत इस्तेमाल किया। सवाल यह उठता है कि देश में जहां आज भी ज्यादातर लोग पैकेट पर दी गई जानकारी पढ़े बगैर चीजें खरीदने के आदी हैं, उन तक सही जानकारी कैसे पहुंचे? इसलिए सरकार को केमिकल रंग बनाने पर ही पाबंदी लगा देनी चाहिए।
संजीत, चिराग दिल्ली

संयम बरते टीम अन्ना
ग्रेटर नोएडा में टीम अन्ना के मुख्य सूत्रधार अरविंद केजरीवाल द्वारा पिछले दिनों सांसदों पर की गई अमर्यादित टिप्पणी को लेकर राजनीतिक हलकों में हो-हल्ला शुरू हो गया है। केजरीवाल खुद प्रशासनिक अधिकारी रह चुके हैं। उन्हें देश-विदेश के कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है और सबसे अहम यह है कि वह पिछले एक साल में जनाकांक्षाओं के प्रतिनिधि के तौर पर उभरे हैं। ऐसे में, उन्हें संयम बरतने की ज्यादा जरूरत है। भावावेश में कही गई बातें टीम अन्ना को आलोचना का पात्र तो बनाएंगी ही, साथ ही जनता के भरोसे को भी छीनेंगी। सब जानते हैं कि सभी सांसद दागी नहीं हैं। कुछ सांसद तो वाकई बहुत अच्छे हैं। इसलिए कुछ के चक्कर में सभी पर उंगली नहीं उठाया जा सकता। अगर संसद का चरित्र बदलना ही है, तो टीम अन्ना को इस दिशा में ईमानदारी से काम करना चाहिए, न कि आलोचना करनी चाहिए। दूसरों की लगातार आलोचना से  टीम अन्ना की अपनी ही छवि खराब हो रही है।
नरेंद्र सिंह ‘नीहार’, दुर्गा विहार, दिल्ली

यह कैसी व्यवस्था
पिछले दिनों दिल्ली के दरियागंज इलाके के एक अनाथालय में तैनात कर्मचारियों ने बच्चों के साथ जो अमानवीय हरकतें कीं, वे वाकई शर्मनाक और निंदनीय हैं। ऐसे बर्बर कर्मचारियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इसके अलावा देश के तमाम सरकारी व गैर-सरकारी अनाथालायों में आईंदा इस तरह की घटनाएं न हों, इसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए। हम यह भी न भूलें कि अनाथ बच्चों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना हम सबकी ही जिम्मेदारी है।
देशबंधु, संतोष पार्क, उत्तम नगर, नई दिल्ली

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