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हर रंग कुछ कहता है..

पीला: पीला रंग पवित्रता का एहसास कराता है। इसी वजह से धार्मिक कार्यों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। यह काफी शुभ रंग माना जाता है। पीला रंग मिलन और आत्मीयता का प्रतीक है।

सुनहरा पीला: आदर्शवादिता और कल्पनाशीलता का सूचक।

लाल: हृदय में शक्ति का संचार करता है। लोगों में उत्साह व साहस का भाव पैदा करता है।

हरा: हरा रंग शीतलता, ताजगी लाने वाला होता है। इस रंग में सराबोर होने के बाद लोग नई ताकत का एहसास करते हैं और उनकी सोच सकारात्मक होती है।

गुलाबी: गुलाबी रंग कोमलता का एहसास कराता है।

सफेद: शांति का प्रतीक

मनाओ तिलक होली
गीले रंगों से होली खेलने पर काफी मात्र में पानी की बर्बादी होती है, यह हमारे पर्यावरण के लिए ठीक नहीं है। इसलिए बेहतर होगा कि तुम कम से कम पानी की बर्बादी करो। अगर संभव हो तो रंगों की बारिश वाली होली खेलने के बजाए सिर्फ गुलाल से तिलक होली खेलो। खुद भी लोगों को गुलाल ही लगाओ और दूसरों से भी गुलाल लगाने को ही कहो।

इन बातों का रखना ध्यान
रंग खेलने से पहले त्वचा पर तेल या क्रीम लगा लेना। इससे रंगों का प्रभाव कम पड़ेगा और उन्हें छुड़ाने में भी आसानी होगी।
इस बात का विशेष ध्यान रखना कि तुम्हारे द्वारा फेंका गया रंग या गुब्बारा किसी दूसरे को चोट न पहुंचाए।

पानी की बर्बादी न करो। ज्यादा पानी बर्बाद करने पर यह खत्म हो जाएगा। सोचो, अगर पानी खत्म हो गया तो तुम कैसे ब्रश करोगे और कैसे नहाओगे।

ज्यादा देर तक रंग ना खेलना, मम्मी नहाने के लिए जब भी बोलें आराम से नहाकर तैयार हो जाना, तभी तो होली पर तुम्हें अच्छे बच्चे का अवॉर्ड मिलेगा।

तुम होली के दिनों में गुजिया और मीठे सामान बहुत खाते हो, इस बार ध्यान रखना कि तुम गुजिया कम खाओ, क्योंकि ज्यादा गुजिया और मीठा खाने से पेट में गड़बड़ी भी हो जाती है।

रंग लगे हाथों से खाने का सामान न छूना और न ही खाना, क्योंकि रंग काफी हानिकारक होते हैं और ये तुम्हें बीमार बना सकते हैं।

तेल, पेंट, ग्रीस आदि का इस्तेमाल न खुद करना और न ही दूसरों को करने देना।

आंख, मुंह और कान में रंग न जा पाए। इस बात का विशेष ध्यान रखना।

त्वचा पर जलन होने या आंखों में रंग जाने पर रंग लगे हाथों से उस भाग को न छूना। जल्दी से मम्मी से बोलना और साफ पानी से उसे अच्छे से साफ करना।

एक्सपर्ट व्यू
होली में प्रयोग किए जाने वाले सिंथेटिक रंगों में कॉपर-सल्फेट का प्रयोग किया जाता है। इसका कुप्रभाव सीधे हमारी आंखों पर पड़ता है। इसके कारण आंखों में एलर्जी, सूजन आ सकती है और अंधे भी हो सकते हैं। इसलिए ध्यान रखें कि नेचुरल कलर का ही इस्तेमाल करें।
(डॉ. अंकुर अग्रवाल, नेत्र रोग विशेषज्ञ, महाराजा अग्रसेन अस्पताल)

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