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बसपा कार्यालय में सन्नाटा, भाजपा खेमे में उदासी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे जैसे-जैसे सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे सत्तारुढ़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं के चेहरों पर सत्ता जाने का गम दिखाई दे रहा है। उधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खेमे में मायूसी इस बात को लेकर है कि मौके को अच्छी तरह से भुनाया नहीं जा सका।

बसपा कार्यालय में सुबह कार्यकर्ता काफी उत्साहित दिखे, लेकिन जैसे-जैसे रुझान सामने आते गए कार्यकर्ताओं ने कार्यालय छोड़कर घरों का रुख करना शुरू कर दिया। बडेम् नेता यह आकलन करने में लगे हुए हैं कि आखिर चूक कहां हुई, लेकिन परिणामों को लेकर कोई बोलने को तैयार नहीं है।

ऐसा माना जा रहा था कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी द्वारा उमा भारती और संजय जोशी को प्रचार की कमान सौंपने का कोई फायदा नहीं मिला। अब उमा के साथ संजय जोशी पर भी गाज गिर सकती है क्योंकि कलराज मिश्रा ने कहा था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ  जो अभियान चलाया गया था उसे हम अंत तक कायम नहीं रख सके।

राजनीतिक विश्लेषक अभयानंद शुक्ल कहते हैं कि गडकरी ने उत्तर प्रदेश में भाजपा की कमान उमा और संजय को सौंपी थी। पार्टी यह मान रही थी कि इसका लाभ मिलेगा लेकिन भाजपा आज भी वहीं खड़ी है जहां वह 2007 में थी।

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