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टीवी पर नेता छाए हैं तो इसका भी है अलग-सबब

टीवी खोलिए। न्यूज चैनलों पर चुनाव नतीजों और रुझानों की खबरों के बीच कांग्रेस-भाजपा के नेता भी दिख रहे हैं तो इसका कारण इन पार्टियों की नई रणनीति है।

इन दलों ने सोमवार को ही तय कर लिया था कि परिणाम भले बुरे आ रहे हों, वे मुंह नहीं छिपाएंगे। पहले आम तौर पर होता यह रहा है कि परिणाम आशा के अनुरूप नहीं हों तो नेता सार्वजनिक मंचों, खास तौर से टीवी चैनलों पर आने से कतराने लगते हैं। पांच राज्यों के चुनाव नतीजों की पूर्व संध्या पर दोनों पार्टियों के नेता चौबीस घंटे बाद पैदा होने वाली स्थिति के मद्देनजर रणनीति बनाते रहे। भाजपा ने अपने नेताओं को हिदायत दी कि नतीजे चाहे जैसे भी हों, सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक सभी पार्टी मुख्यालय में मौजूद रहें और उसके बाद टीवी चैनलों पर जाने में भी आनाकानी न करें।

वैसे नतीजों के बाद कहीं पार्टी का रंग फीका न पड़े, शायद यह सोचकर भाजपा नेताओं ने सोमवार को नितिन गडकरी के घर होली भी मना ली। कांग्रेस ने भी मीडिया पर मंत्री समूह की बैठक में मंगलवार की रणनीति बनाई। कांग्रेस नेता इस बात पर ज्यादा असहज रहे कि परिणाम अच्छे नहीं आए तो राहुल गांधी पर पूछे गए सवालों की क्या प्रतिक्रिया देनी होगी। चूंकि यूपी का पूरा प्रचार राहुल गांधी के इर्द-गिर्द ही केंद्रित था, लिहाजा पार्टी को अहसास है कि सवाल भी इसी पर ज्यादा होंगे। पार्टी ने मीडिया से बातचीत के लिए 18 लोगों की टीम बनाई है।

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