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राज्यसभा की बाट जोह रहे कई भाजपा नेता

विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ही भाजपा के कुछ नेता उत्तर प्रदेश से राज्यसभा पहुंचने की राह ताकने लगे हैं। यूपी से पार्टी के दो सदस्य अगले महीने रिटायर हो जाएंगे। यह दोनों आला नेताओं- कलराज मिश्र व विनय कटियार को दोबारा मौका मिलना मुश्किल है।

मिश्र लगातार ऊपरी सदन में दूसरा कार्यकाल पूरा करेंगे। साथ ही वह यदि विधानसभा जीतते हैं तो यूपी में पार्टी के नेता पद के दावेदार होंगे। ऐसे में कुछ प्रदेश तो कुछ बाहर के उम्मीदवार यूपी पर नजर टिकाए हैं। प्रदेश के अंदर जो दावेदार हैं उनकी किस्मत बहुत हद तक मंगलवार के नतीजों पर निर्भर करेगी। इनमें संतोष गंगवार प्रमुख हैं। गंगवार को लोकसभा चुनाव हारने के बाद राज्यसभा के लिए इंतजार करने के लिए कहा गया था। केंद्रीय नेतृत्व ने कड़ा संकेत दिया है कि जो प्रदेश के नेता विधानसभा चुनाव हार जाते हैं उन्हें तुरंत राज्यसभा में मौका देने की संभावना नहीं है। प्रदेश से बाहर वालों में सुधींद्र कुलकर्णी, धर्मेंद्र प्रधान और प्रवक्ता निर्मला सीतारमन प्रमुख हैं। लालकृष्ण आडवाणी के सहायक रह चुके कुलकर्णी की अहमियत ‘नोट के बदले वोट’ कांड के चलते पार्टी में बढ़ गई है। वैसे तो उन्हें मुंबई का निवासी माना जाता है, मगर उन्होंने यूपी चुनाव में पार्टी का घोषणा पत्र तैयार करने से लेकर कई चीजों में मदद की है। महाराष्ट्र से पार्टी को एक ही सीट मिलेगी जो फिलहाल बाल आप्टे के पास है। लिहाजा, कुलकर्णी को यूपी से मौका मिल सकता है।

इसके साथ महासचिव धमेंद्र प्रधान यूपी या मध्य प्रदेश से लाए जा सकते हैं। प्रधान इन दिनों अध्यक्ष नितिन गडकरी के खास माने जाते हैं। निर्मला सीतारमन पिछली दफा स्मृति ईरानी से बाजी हार गई थीं। इस बार उन्हें मौका मिलने की पूरी गुंजाइश है।

 

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