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छात्र की मौत के लिए प्रशासन को जिम्मेदार बताया

एम्स में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र की मौत के बाद सोमवार को छात्र हड़ताल पर चले गए। अनिल की मौत का जिम्मेदार एम्स प्रशासन को बताते हुए छात्रों ने टीचिंग ब्लॉक में नारेबाजी की। इस बावत निदेशक से मिलने गए छात्र संघ के सदस्यों की मुलाकात भी बेनतीजा रही। उनका कहना था कि छात्रों की परेशानियों को समझने और काउंसलिंग के लिए एम्स प्रशासन ने कोई आश्वासन नहीं दिया। वहीं देर शाम निदेशक सहित डीन और संस्थान कर्मचारियों की उपस्थिति में शोक सभा का आयोजन किया गया।

एम्स में अनिल कुमार मीणा की मौत ने वर्ष 3 मार्च 2010 के घावों को हरा कर दिया, यह वह मौका था जबकि तृतीय वर्ष के मध्य प्रदेश के छात्र बालमुकुंद भारती ने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद रविवार देर शाम कैंडल मार्च निकालने के बाद सोमवार सुबह स्नातक और परास्नातक के छात्र क्लॉस से बॉयकाट कर हड़ताल पर चले गए। छात्रों के विरोध को देखते हुए सोमवार से शुरु होने वाली इंटरनल परिक्षाओं को भी रोक दिया गया, देर शाम तक परीक्षा की अगली तारिखें भी घोषित नहीं की गईं। छात्रसंघ के कुलदीप शर्मा ने बताया कि थोरॉट कमेटी की सिफारिशों को लागू करने व छात्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए एम्स के निदेशक से बात की गई, लेकिन कोई आश्वासन नहीं दिया गया। यूजी छात्र जीशान ने बताया कि मुलाकात बेनतीजा निकलने के बाद छात्रों ने हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है। अनिल की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन पर उतरे यूजी के किसी भी छात्र ने पढ़ाई नहीं की। वहीं छात्र की मौत के बाद एम्स के जवाहर लाल ऑडिटोरियम में शोक सभा का आयोजन किया गया। सभा में उपस्थित निदेशक प्रो. आरसी डेका ने कहा कि छात्र की मौत दुखद घटना है। प्रशासन छात्रों की परेशानियों को समझने और उन्हें दूर करने की पूरी कोशिश करेगा।

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