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राजनीतिक पसंद में अलग नहीं युवा

राजनीतिक पार्टियों के बारे में युवाओं की सोच दूसरों से भले ही अलग हो पर जब वोट देने की बात आती है तो युवा भी दूसरों से अलग दिखाई नहीं पड़ते हैं। सर्वे के आंकड़ों से यह साफ दिखाई पड़ता है कि जब वोट देने की बारी आती है और जब यह निर्णय लेना होता है कि किस पार्टी को वोट करें, तो युवाओं का निर्णय दूसरों से अलग दिखाई नहीं पड़ता।

पिछले पांच लोकसभा चुनावों में युवाओं का वोट अलग-अलग पार्टियों को मिलता रहा है और यह कहना मुश्किल है कि युवाओं की कोई खास पसंदीदा पार्टी है। अगर हम कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस को युवाओं और दूसरों के वोट लगभग बराबर मिलते रहे हैं। हालांकि कुछ चुनावों में कांग्रेस को युवाओं की तुलना में दूसरों के वोट ज्यादा मिले हैं।

अगर हम भाजपा की बात करें तो आंकड़ों से यह भी स्पष्ट नहीं होता है कि भाजपा की पकड़ युवा मतदाताओं पर मजबूत है। पिछले पांच चुनावों में कांग्रेस की तरह भाजपा को भी युवाओं और दूसरों के वोट  बराबर अनुपात में मिलते रहे हैं, अंतर इतना है कि जहां कांग्रेस को कुछ चुनावों में युवाओं की तुलना में दूसरों से वोट ज्यादा मिले, वहीं भाजपा को दूसरों की तुलना में युवाओं के वोट ज्यादा मिले।

2009 के लोस चुनाव में भाजपा के खराब प्रदर्शन के बावजूद भी पार्टी को दूसरों की तुलना में युवाओं के वोट ज्यादा मिले। आमतौर पर यह धारणा है कि युवाओं पर वामपंथी पार्टियों की पकड़ बहुत मजबूत है परंतु सर्वे के आकंड़ों से यह पता चलता है कि वामपंथी पार्टियों को वोट देने वालों में युवाओं और दूसरों का अनुपात लगभग बराबर है।

वोट देने के मामले में युवकों और युवतियों की पसंद में कुछ अंतर दिखाई पड़ता है। युवतियों की राजनीतिक पसंद के रूप में कांग्रेस की बीजेपी पर बढ़त रही है। वहीं युवकों की राजनीतिक पसंद में बीजेपी कांग्रेस से आगे है। इसी तरह जहां ग्रामीण युवाओं की राजनीतिक पसंद कांग्रेस है, वहीं दूसरी ओर पिछले कई चुनावों से शहरी युवा बीजेपी को वोट देते रहे हैं।

2004 के लोस चुनावों के बाद शहरी युवा मतदाताओं के बीच भाजपा की लोकप्रियता में गिरावट आई। वोट के मामले में शिक्षित व अशिक्षित युवाओं की पसंद में अंतर दिखाई पड़ता है। पिछले कई चुनावों में कॉलेज पास युवाओं में भाजपा की कांग्रेस पर बढ़त रही है। जबकि अशिक्षित युवा मतदाताओं के बीच कांग्रेस की भाजपा पर बढ़त रही है।

यह ध्यान देने की बात है कि 2009 के लोस चुनाव में कॉलेज पास युवाओं में भाजपा की कांग्रेस पर जो बढ़त थी वह भी पार्टी ने गंवा दी है। अगड़ी जाति के युवाओं के बीच भाजपा की कांग्रेस पर जो बढ़त थी वह भी पार्टी ने गंवा दी। 1996 के लोकसभा चुनाव में अन्य पिछड़े वर्ग के युवा मतदाता कांग्रेस व भाजपा के बीच बराबर बंटे हुए थे। 1998 व 1999 के लोकसभा चुनावों में अन्य पिछड़े वर्ग के युवा मतदाताओं के बीच भाजपा ने कांग्रेस पर बढ़त बनाई, परंतु उसके बाद के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपनी यह बढ़त गंवा दी।

पिछले कुछ चुनावों में बसपा की बढ़ती लोकप्रियता का बड़ा कारण है कि पार्टी को दलित युवाओं का वोट बड़ी संख्या में मिल रहा है। कुछ खास राज्यों में दलित युवाओं ने भले ही कांग्रेस का साथ छोड़ दिया हो, पर कुल मिलाकर दलित युवाओं के बीच कांग्रेस की लोकप्रियता में कोई गिरावट नहीं आई है।

भाजपा की लोकप्रियता युवा आदिवासी मतदाताओं में ज्यादा है, जबकि कांग्रेस की लोकप्रियता युवाओं की बजाय दूसरी आयु के मतदाताओं में ज्यादा है।

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