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होली शुरू होने से पहले ही होली के रंग में

 मथुरा। निज संवादाता।

बरसाना और नंदगांव की लठामार होली के बाद श्रीकृष्ण जन्मस्थान की लठामार होली की बारी थी। होली शुरू होने मे काफी समय था उससे पहले ही प्रांगण होली के रंग में रंग गया। दर्शक जमकर झूम रहे थे। मंच से एक से बढ़कर एक प्रस्तुति के आगे श्रद्धालु अपने को रोक नहीं पा रहे थे। राधा-कृष्ण की प्रेमभरी फूलों और अबीर गुलाल की होली में ऐसे रंगे की घंटों कब बीत गए पता नहीं चला। जन्मस्थान की होली को देखने के लिए सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे। देखते ही देखते जन्मस्थान के गेटों पर लम्बी कतारें लग गयीं। मंच पर कार्यक्रमों की शुरूआत होने से पहले ही श्रद्धालुओं ने जगह घेरना शुरू कर दिया। काष्र्णि गुरुशरणानंद महाराज ने राधा-कृष्ण के स्वरूपों का आरती कर कार्यक्रमों की शुरूआत की। इसके बाद मंच से सास्कृतिक कार्यक्रमों की झड़ी लग गयी। मयूर नृत्य देख दर्शक झूम उठे। जब कृष्ण ने बरसाना में मोरकु टी पर श्याम मोर बन आए रसिया गाया तो द्वापर युग जीवंत हो उठा।

अखिंया में श्याम ने एसो रंग डारो मोपे होली खेली न जाए गाया तो श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। होली में गोपिकाओं ने कंहैया को प्रेम भरी गालियां भी दीं। श्याम तेरी बहन शुभद्रा बड़ी प्यारी, अर्जुन संग भागी गाया तो दर्शक झूमने लगे। इसके बाद श्याम कहां मानने वाले थे। उन्होंने भी गोपिकाओं से कट्टी तक कर डाली। कृष्ण जी जब गाते हैं कि सुन ले वृषभान की छोरी जो तुने न खेली मेरे संग होली,तेरी-मेरी कट्टी है जावेगी तो हर कोई होली के रंग में रंग गया। मैं बरसाने की छोरी, कर न मोते बलजोरी, रंग बरसाने आए हैं नटवर नंद किशोर रसिया ने तो मानों श्रद्धालुओं के मन को छू लिया। फिर क्या था जो दर्शक शांत थे वह भी अपने को झूमने से रोक न सके। चरकुला नृत्य और फूलों की होली ने वातावरण को मनमोहक बना दिया। जमकर धमाल हो रहा था। यहां आए श्रद्धालुओं को महसूस हो रहा था कि ब्रज की होली ऐसे ही प्रसिद्ध नहीं है। धीरे-धीरे शाम हो रही थी। श्रद्धालुओं का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच रहा था। लठामार होली का समय हो रहा था। अचानक लोगों के कानों में लाठियों की तड़तड़ाहट की आवज गूंजनें लगती है। हुरियारे और हुरियारिनें आने का एनाउंस होता है। सब गाने लगते है आज ब्रज में होरी रे रसिया। अबीर-गुलाल की बरसात होती है। कोई भी इससे बचना नहीं चाहता था। होली की मस्ती में सभी डूब जाते हैं और इसी के साथ लठामार होली की शुरुआत हो जाती है ।

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