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बिना सत्यापन नौकरों पर भरोसा पड़ रहा भारी

नोएडा। कुलदीप सिंह।

घरेलू काम के लिए नौकर रखने से पहले उनका सत्यापन न कराना लोगों को भारी पड़ रहा है। नौकरों द्वारा चोरी करने की वारदात से सबक न लेने का खामियाजा लोगों को उठाना पड़ रहा है। पिछले दो महीने में चार बड़े मामले प्रकाश में आए हैं, जिनमें नौकर अपने मालिकों को करोड़ों की चपत लगाकर फरार हो गए। इन नौकरों का सत्यापन नहीं होने से पुलिस भी मामले का खुलासा नहीं कर पाई है। सेक्टर-51 के केंद्रीय विहार में रहने वाले एक प्रॉपर्टी डीलर के घर काम करने वाली नौकरानी एक मार्च को 10 लाख रुपए के जेवर लेकर फरार हो गई। इसके बाद नौकरों के हवाले घर छोड़ना कितना मुनासिब है, यह मुद्दा फिर गरमाने लगा है।

पुलिस बार-बार लोगों से घरेलू नौकरों का सत्यापन कराने की अपील करती है, लेकिन लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं। कहां से आते हैं नौकरनोएडा में बड़ी तादात में पश्चिम बंगाल, पूर्वाचल, उत्तराखंड और नेपाल के नौकर-नौकरानी लोगों के घरों में काम करते हैं। घरेलू नौकरानियों को तनख्वाह उनके काम के हिसाब से दी जाती है। 2 हजार रुपए महीने से लेकर 8 हजार रुपए महीने तक में ये उपलब्ध हैं। कुछ लोग सुबह व शाम घर के काम के लिए नौकर रखते हैं तो कुछ नौकरों के रहने की व्यवस्था घर पर ही करते हैं। 20 हजार से अधिक हैं घरेलू नौकरशहर में करीब 20 हजार घरेलू नौकर काम करते हैं। ये नौकर 75 हजार से अधिक घरों में काम करते हैं। इसमें से 20 प्रतिशत ही प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से रखे जाते हैं। बाकी को लोग अपने पड़ाेसी या जानकारों के माध्यम से काम पर रख लेते हैं।

सत्यापन की क्या है व्यवस्था

आरडब्ल्यूए कार्यालय में नौकरों के सत्यापन के लिए फार्म मौजदू रहते हैं। इसके अलावा संबंधित कोतवाली से भी सत्यापन के फार्म लिए जा सकते हैं। पिछले एक साल में शहर में करीब एक लाख बीस हजार गार्ड, नौकर, चौकीदार, किरायेदारों के सत्यापन के लिए आवेदन आए हैं। सहयोग नहीं मिलताएसपी सिटी अनंत देव ने बताया कि पुलिस हर स्तर पर नोएडा के लोगों को सुरक्षा के लिहाज से सत्यापन कराने के लिए जागरूक कर रही है, लेकिन लोग पूरा सहयोग नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि नौकर के वारदात करने पर उसका सत्यापन नहीं कराने वाले लोग कभी भी संकट में पड़ जाते हैं।

प्लेसमेंट एजेंसी से लेना ज्यादा बेहतर घरेलू नौकरों को उपलब्ध कराने वाली प्लेसमेंट एजेंसी से नौकर लेना ज्यादा बेहतर होता है। एजेंसी मालिक इनका पहले से सत्यापन करा लेते हैं। किसी तरह की वारदात होने पर नौकर के वेरीफिकेशन की जिम्मेदारी एजेंसी मालिक की होती है। यह 11 महीने के अनुबंध पर नौकर देते हैं और इसके लिए 15 से 25 हजार रुपए कमीशन लेते हैं।

क्या कहते हैं आरडब्ल्यूए पदाधिकारी

फेडरेशन ऑफ सेक्टर-62 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष राजीव सत्यकाम ने बताया कि घरेलू नौकरों द्वारा की जा रही वारदात को ध्यान में रखते हुए सभी सोसाइटी में नौकरों का सत्यापन कराने को कहा गया है। नौकरों से फॉर्म भरवाकर उन्हें पुलिस के पास सत्यापन के लिए भेज दिया जाता है। नेपाल और पूवरेत्तर इलाकों से आने वाले नौकरों का सत्यापन करने में परेशानी होती है। लोगों को स्वयं भी अपने स्तर से नौकरों पर निगाह रखकर उनकी गतिविधियां देखनी चाहिए।

------------------मैंने अपने एक दोस्त के कहने पर एक नौकरानी को दो महीने पहले काम पर रखा था। सुबह दो घंटे काम करने के बाद यह चली जाती है। अभी इसका वेरीफिकेशन नहीं कराया है। काम के दौरान नौकरानी पर निगाह रखती हूं। वर्षा सिंह, निवासी सेक्टर-44पिछले चार साल से प्लेसमेंट एजेंसी से ही घरेलू काम के लिए नौकरानी रख रही हूं। हालांकि एजेंसी से नौकर लेने पर यह थोड़ा महंगा होता है लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से यह बेहतर है। एजेंसी से नौकर लेने पर वेरीफिकेशन की जिम्मेदारी एजेंसी की ही होती है। -शांता अरोड़ा, निवासी सेक्टर-12नौकरों को काम पर रखने से पहले उनके संबंध में पूरी छानबीन कर लेता हूं। काम के दौरान उन पर पूरी निगाह रखता हूं। आरडब्ल्यूए से पुलिस सत्यापन का फार्म भरकर भेज दिया है। अनीस अहमद, निवासी सेक्टर-19मैं दिन भर घर से बाहर रहता हूं इसलिए काम के लिए नौकरानी रखी है। पिछले चार साल से वह घर का काम कर रही है। अभी पुलिस वेरीफिकेशन नहीं कराया है। -आरएस गुप्ता, निवासी सेक्टर-19

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