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आचार संहिता के उल्लंघन पर गंभीर हो जुर्माना: कुरैशी

मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने रविवार को कहा कि चुनाव आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने पर जुर्माने को और अधिक सख्त बनाने के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में सुधार करना चाहिए। कुरैशी ने आचार संहिता को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के समर्थन पर अप्रसन्नना जाहिर की।

पत्रकारों से बातचीत में कुरैशी ने कहा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराने के लिए आयोग के पास अधिकार हैं। आयोग को और अधिकारों की जरूरत नहीं है।

कुरैशी ने कहा कि चुनाव आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने पर दंड को और अधिक सख्त बनाने के लिए हमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के कुछ प्रावधानों में थोड़ा बदलाव करने की जरूरत है।

आयुक्त ने कहा कि आचार संहिता के उल्लंघन पर वर्तमान दंड हास्यास्पद है। उन्होंने कहा कि अधिनियम में उल्लंघन के लिए मात्र 500 रुपये जुर्माने का प्रावधान है जबकि इसे बढ़ाकर आज की वास्तविकताओं के अनुरूप करने की जरूरत है।

उल्लेखनीय है कि कुरैशी का यह बयान पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान सम्पन्न होने के बाद आया है।

इसके अलावा कुरैशी ने आचार संहिता को संवैधानिक दर्जा देने की चर्चा पर अपनी अप्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह अनोखा दस्तावेज है जिसे राजनीतिक पार्टियों ने चुनावों के दौरान अनुशासन बनाए रखने के लिए खुद ही विकसित किया।

उन्होंने कहा कि आचार संहिता अपना काम प्रभावी ढंग से कर रही है। इसमें थोड़ा बदलाव करने की जरूरत है।

कुरैशी ने कहा कि आचार संहिता को संवैधानिक दर्जा दिए जाने का समर्थन बेतुका सलाह है। जब हमें किसी ताकत की आवश्यकता नहीं है तो आप हमें इसे क्यों जबरन दे रहे हैं।

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