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महिला ने छुड़वाई डीडीए की जमीन

सरकारी जमीन पर हुए कब्जे को छुड़वाकर एक आम महिला ने मिसाल पेश की है। डीडीए ने इसे कब्जा ही नहीं माना था, बावजूद इसके महिला कोर्ट में पांच साल तक अवैध कब्जे को लेकर लड़ती रही।

उन्होंने कई परेशानियों के बावजूद कोर्ट में सबूत पेश करते हुए अपने दावे को पुख्ता किया। आखिरकार कोर्ट ने डीडीए को कब्जा हटवाने के निर्देश देते हुए, महिला के शानदार प्रयासों की सराहना की है। सरकारी विभागों के लिए मिशाल पेश करने वाली महिला कोई और नहीं राजेन्द्र नगर निवासी जानकी देवी हैं। इनके घर के निकट पूरनचंद ने गली में दीवार बनाकर कारें खड़ी करने के लिए गैराज बना लिया। वहीं गोपालदास ने रास्ते में अवैध निर्माण कर ढाबा बनाया। महिला ने 13 मार्च 2007 को दोनों के खिलाफ मुकदमा दायर करवाया था। जांच में डीडीए ने इसे अवैध कब्जा नहीं माना, लेकिन महिला जुटी रही।

सरकारी सर्वेक्षक ने कब्जे की पुष्टि की। इसके बाद महिला ने अन्य सबूत पेश किए। तीस हजारी स्थित एडिशनल सीनियर सिविल जज गौतम मनन की अदालत ने पूरे मामले पर संज्ञान लेने के बाद कब्जों को अवैध करार दिया। इस दौरान कोर्ट ने महिला के साहसी कदम को उन विभागों के लिए सबक बताया जो अपनी संपत्ति को लेकर लापरवाह रहते हैं।

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