DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नई दिशा का संकेत देते संपन्न हुए चुनाव

पांच राज्यों में संपन्न चुनावों में इस बार जिस तरह लोग मतदान के लिए बाहर निकले हैं उससे यह उम्मीद तो बनती है कि आम मतदाता की वोट देने के अपने अधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ी है और इसके साथ ही इस अधिकार के सफल क्रियान्वयन को लेकर उसकी अपेक्षाएं भी।

इससे यह जिज्ञासा भी पैदा होती है कि क्या आम मतदाता नई दिशा तलाश रहा है जिसका सत्ता की राजनीति से शायद ज्यादा सरोकार नहीं है। क्या वह बेहतर विकास चाहता है, उसे रोजगार के ज्यादा अवसर चाहिए। वह जातिगत राजनीति से बाहर निकलना चाहता है या फिर जाति को समाज के सशक्तिकरण का हथियार बनाना चाहता है। चुनाव वाले सभी पांचों राज्यों में मतदान का प्रतिशत अधिक रहा है। पहली बार वोट देने वालों की संख्या बढ़ी है। इसमें वह भी हैं जो पहली बार वोटर बने हैं।

मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग के प्रयासों के अलावा चुनाव अभियान में राहुल गांधी से लेकर अखिलेश सिंह यादव तक युवा चेहरों की मौजूदगी को इसका श्रेय दिया जा सकता है। यह भी शायद पहली बार हुआ कि युवाओं में जितनी भागीदारी पुरुषों की थी महिलाओं की उससे कम नहीं थी। अकेले यूपी में इस बार महिलाओं की भागीदारी 42 फीसदी बढ़ी है।

एक और खासियत यह भी रही कि एक-दो घटनाओं को छोड़ राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने अभियान को व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोपों के बजाय मुद्दों पर ही केंद्रित रखा। युवा वर्ग से जुड़े मुद्दे काफी मुर्खता से उभरे। रोजगार का मामला हो या पढ़ाई का, सभी दलों ने इन्हें प्राथमिकता में रखने का वादा किया। अन्ना हजारे व उनकी टीम के सदस्यों की आवाज उतनी जोर से भले न सुनाई दी हो पर भ्रष्टाचार के खिलाफ सभी दल बोले। एक दूसरे के भ्रष्टाचार के मामलों को मुद्दा बनाने में कसर नहीं छोड़ी।

राज्य में मौजूद दलों ने केंद्र के भ्रष्टाचार की बात की तो केंद्र में शासन कर रही पार्टी के निशाने पर राज्यों में सत्तारूढ़ दल थे। यूपी, उत्तराखंड व पंजाब में दूसरा बड़ा मुद्दा विकास व सुशासन का था। इसी से हमारे लोकतंत्र के दिनों दिन परिपक्व व मजबूत होने की उम्मीद भी बंधती है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:नई दिशा का संकेत देते संपन्न हुए चुनाव