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अबकी तो हार-जीत का अंतर होगा बेहद कम!

परिसीमन से बदले समीकरण और अरसे बाद यूपी के विधानसभा चुनाव में चार दलों की मौजूदगी ने सोलहवीं विधानसभा की लड़ाई को कड़ा बना दिया है। खुद सियासी विश्लेषक मानते हैं कि  लंबे समय बाद चतुष्कोणीय मुकाबला होने के कारण इस बात की संभावना तय मानी जा रही है कि इस बार  सीटों पर जीत का अंतर काफी कम रह सकता है ।

पहले छह चरण और आज सातवें चरण के मतदान के बाद भले ही चुनावी नतीजे बहुमत और त्रिशंकु विधानसभा के बीचं उलङो हुए लग रहे हों लेकिन इससे शायद ही किसी को इनकार हो कि लंबे समय बाद मौजूदा चुनावी परिदृश्य में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के अलावा कांग्रेस की उपस्थिति भी रही है।

सीटों की संख्या को लेकर भले ही मतभेद हों परन्तु करीब डेढ़ दशक बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है जिसमें विधानसभा क्षेत्रों में जाने पर लोगों की जुबान पर तीन के बाद चौथे दल का भी नाम था। जानकारों का मानना है कि इसी के चलते इस बार अधिकांश विधानसभा सीटों पर बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति थी।

ऐसी विधानसभा सीट अपेक्षाकृत कम होंगी जहां किन्हीं दो दलों में सीधा मुकाबला हो और किन्हीं दो प्रत्याशियों को छोडक़र बाकी प्रत्याशी मुकाबले से बाहर हों। यही कारण है कि इस बार चुनावी नतीजों में हार-जीत का अंतर कम रहने की संभावना है। वहीं इस बार तमाम सीटों पर अप्रत्याशित नतीजे आ सकते हैं।

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