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तकनीक से बदलें तस्वीर

यूरोप के दूसरे देशों की तरह ही ब्रिटेन भी आर्थिक परेशानी से गुजर रहा है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन हर रोज जनता की समस्याएं सुलझाने के लिए इन परेशानियों से जूझ रहे हैं। यहां प्रस्तुत है उनका एक ऐसा भाषण, जो ब्रिटेन ही नहीं, दुनिया के सभी मुल्कों को ऐसी परेशानियों से निपटने का रास्ता दिखाता है।

आज हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि कैसे हम बिना ज्यादा पैसा खर्च किए लोगों को बेहतर सुविधाएं दे सकें। अगर आप सोचते हैं कि हालात को और बेहतर बनाने के लिए अधिक धन होना जरूरी है, तो समझ लीजिए कि आपकी दिक्कतें कभी कम नहीं होंगी। मेरा मानना है कि अगर हम सूचना क्रांति का इस्तेमाल करते हुए सही राजनीतिक दर्शन और सही राजनीतिक विचार के साथ प्रयास करें, तो हमारे सामने समाज को खुशहाल बनाने के लिए आज बेहतरीन अवसर मौजूद हैं।

सूचना क्रांति
यकीनन सूचना क्रांति ने हमें कई तरह के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। आधुनिक सूचना माध्यमों ने न केवल लोगों को जागरूक बनाया है, बल्कि उन्हें वह असाधारण शक्ति प्रदान की है, जिसकी मदद से वे अपने नेताओं के कार्यों पर नजर रख सकते हैं। मैं आप सभी को बताना चाहता हूं कि कैसे हम सूचना क्रांति की मदद से राजनीति, सरकार और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार करके समाज को खुशहाल बनाने की दिशा में काम कर सकते हैं। सबसे पहले मैं राजनीतिक दर्शन की बात करूंगा। मेरा मानना है कि अगर हम लोगों को ज्यादा अधिकार और ज्यादा विकल्प मुहैया कराएंगे, तो समाज और मजबूत होगा। ऐसा समाज, जहां लोगों के फैसलों को ज्यादा अहमियत दी जाती है, वहां ज्यादा खुशहाली होती है।

जनभावनाओं की समझ
एक और अहम बात है, और वह है मानव व्यवहार को समझना। नेता तभी सफल हो सकते हैं, जब वे लोगों को वैसे ही स्वीकार करें, जैसे वे हैं, न कि वे अपनी सोच के हिसाब से लोगों को बदलने की कोशिश करें। बेहतर यही है कि नेता लोगों के साथ उनके स्वभाव के हिसाब से व्यवहार करें और उनकी बेहतरी के लिए प्रयास करें। मेरा मानना है कि अगर नेता इस दायरे में रहकर काम करेंगे, तो वे बहुत ज्यादा धन खर्च किए बिना ही लोगों को बेहतर सेवाएं दे पाएंगे। समाज में खुशहाली लाने का यह बेहतर रास्ता हो सकता है। बेहतर सरकार देने के लिए जरूरी है कि नेता लोगों को समझना सीखें।

तीन अहम पड़ाव
अब जरा इतिहास पर नजर दौड़ाएं। हम व्यवस्था के तीन अहम पड़ाव से गुजरे हैं। पहला है पूर्व नौकरशाह युग, नौकरशाह युग और नौकशाही के बाद का युग। आप इस बात को ऐसे समझ सकते हैं। मैं इसे और आसान कर देता हूं: पहले हम ऐसे समाज में रहते थे, जहां स्थानीय नियंत्रण था, इसके बाद आया केंद्रीय नियंत्रण का युग और अब जन नियंत्रण का जमाना है। यानी स्थानीय सत्ता, केंद्रीय सत्ता और अब लोक सत्ता। पूर्व नौकरशाह युग में लोगों को एक से दूसरे स्थान तक जाने में हफ्तों लगते थे, सूचनाओं का अभाव था, लिहाजा सब कुछ स्थानीय स्तर पर तय होता था। इसके बाद आया केंद्रीय सत्ता का युग, जब सारे अधिकार केंद्र के पास चले गए और व्यवस्था में स्थानीय नियंत्रण खत्म हो गया।

लोकसत्ता
अब हम लोक सत्ता के युग में प्रवेश कर रहे हैं, जहां विशाल सूचना प्रवाह ने एक क्रांति पैदा कर दी है। यह क्रांति व्यवस्था के मायने बदल सकती है। जरा सोचिए, आज से सौ साल पहले हमें किसी को दस शब्दों का संदेश भेजने में कितना पैसा खर्च करना पड़ता था, लेकिन आज हम मिनटों में बिना पैसा खर्च किए तमाम सूचनाएं हासिल कर सकते हैं। 

सूचना क्रांति और सरकार
आप कहेंगे कि सूचना क्रांति का राजनीति, सार्वजनिक सेवाओं और सरकार से भला क्या संबंध है। मैं आपको कुछ उदाहरण देता हूं कि कैसे हम सूचना क्रांति की मदद से लोगों की जिंदगी बदल सकते हैं। गौर कीजिए, पिछले कुछ साल में हमारे शॉपिंग करने, यात्रा करने और बिजनेस करने के तरीके में कितना बदलाव आया है। इस बदलाव की वजह है: सूचना और इंटरनेट क्रांति। इस क्रांति ने लोगों की जिंदगी बदल दी। इस क्रांति का असर हमारी सरकार के कामकाज पर पड़ना चाहिए। यह कैसे होगा?

पारदर्शिता, विकल्प और जवाबदेही
हम सूचना और इंटरनेट क्रांति की मदद से सरकारी कामकाज को सुधार सकते हैं। इसके तीन तरीके हैं। पहला सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, ज्यादा विकल्प और जवाबदेही। एक समय था, जब कुछ प्रभावशाली लोगों तक ही सरकारी सूचनाएं सीमित रहा करती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं होना चाहिए। सरकारी विभागों और उनके कामकाज संबंधी सभी अहम सूचनाएं वेबसाइट पर होनी चाहिए, ताकि लोगों पता चल सके कि उनके नेता उनके क्षेत्र में किस योजना के लिए कितना पैसा खर्च कर रहे हैं। लोगों को यह पता होना चाहिए कि किस योजना के लिए कितने का ठेका दिया गया और इसकी शर्तें क्या थीं। मेरा मानना है कि पारदर्शिता सरकारी कामकाज में बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है।

दूसरा है विकल्प। आज शिक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य व अन्य सेवाओं के बारे में इंटरनेट पर सूचनाओं का अंबार है। ये सूचनाएं लोगों को अनगिनत विकल्प मुहैया कराती हैं। यह एक बड़ा बदलाव होगा। तीसरा है: जवाबदेही। मसलन, लोगों को यह पता होना चाहिए कि  किस इलाके में सबसे ज्यादा अपराध हो रहे हैं, ताकि उस इलाके की पुलिस की जवाबदेही तय हो सके। सूचना क्रांति के इस युग में यह बहुत आसान है।
प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

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