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दादा की होली याद दिलाती है करीना

राजकपूर के जमाने में होली में रंगों में जिंदगी की रंगीनी घुली होती थी तो मस्ती बनकर लहू में तैर जाने वाला भांग का नशा भी। उस वक्त की होली को याद करते हुए शौ मैन राज कपूर के बड़े बेटे रणधीर कपूर की आंखें सतरंगी होने लगती हैं। उसकी खुमारी उन पर तारी होने लगती है।

लगता है उनका मस्ती में डूबा स्वर कहीं दूर से आ रहा है। यह बताते वक्त उनकी आवाज लरज जाती है कि अब बॉलीवुड में कहीं भी न वैसी होली दिखती है और न होली को लेकर वैसा उत्साह। वह बताते हैं- हां, होली तो आरके स्टूडियो में अब भी मनती है, लेकिन अब यहां सिर्फ रस्म की अदायगी भर होती है।

अब राजकपूर नहीं रहे, वो शानो-शौकत भी नहीं रही। जमाना बदल गया। लोग बदल गए। यह बदलना अपने साथ बहुत सारे बदलाव भी लेकर आया है। सबसे अहम तो यह कि लोगों के जीने का अंदाज बदला। इस पीढ़ी के लिए काम ही सब कुछ हो गया है। एक बार की बात बताऊं, एक होली में रणबीर कपूर अमेरिका में शूटिंग कर रहे थे, इसलिए उन्होंने होली तक नहीं मनाई। बोलते-बोलते वो एक बार फिर अतीत में खो जाते हैं, जैसे उनके सामने यादों का कोई एलबम खुल गया हो- क्या मजाल थी कि राजकपूर के जमाने में ऐसा हो जाता।

होली के दिन कपूर खानदान का कोई आदमी घर के बाहर रहता। उस वक्त तो होली के दिन सिर्फ कपूर खानदान के लोग ही नहीं, पूरा बॉलीवुड आरके स्टूडियो में जमा हो जाता था। रंगों में पुते चेहरे पहचान में नहीं आते थे। सब जमकर धमाल मचाते थे।

मैं बहुत छोटे से होली का यह नजारा देखता आ रहा हूं। कमाल के दिन थे वे। सुबह से शाम तक रंग और भंग का दौर लगातार चलता रहता था। स्टार स्टेटस ताक पर रख दिये जाते थे। बड़े बड़े सितारे, नामी अभिनेत्रियां, प्रोडय़ूसर, डायरेक्टर सब तो यहां आते थे। छोटे बड़े सह कलाकार, कैमरामैन, टेक्नीशियन। यहां तक की एक्स्ट्रा कलाकार भी। सब बराबर होते थे, कोई छोटा-बड़ा नहीं। बताते-बताते रणधीर कपूर गुनगुनाने लगते हैं। लगता है कहीं दूर से उनके कानों में संगीत की ध्वनियां आ रही हैं और वह उसमें साथ दे रहे हैं।

रणधीर कपूर बताते है- होली के मौके पर आरके स्टूडियो में सितारा देवी गाने आती थीं। उनकी आवाज की मिठास पूरे वातावरण में पुए की तरह घुल जाती थी। शंकर-जयकिशन का संगीत पूरे वातावरण में ठंडाई के खुमार की तरह होता था।  बोलते-बोलते रणधीर कपूर का गला भर्रा जाता है- पूरे आयोजन का खयाल राजकपूर खुद रखते थे। हर एक को खाना खिलाते थे, रंग लगाते थे और होली के रंग और उमंग के साथ-साथ लोगों के आपसी गिले-शिकवे भी दूर करने के लिए माहौल बनाते थे।

आरके स्टूडियो की होली के बारे में बताते-बताते वह अतीत से निकल आते हैं- अब कपूर खानदान की तीसरी पीढ़ी भी आ गई है।  करीना है कोई होली मिस नहीं करती। उसे होली खेलने में बहुत मजा आता है। उसकी मस्ती देखकर उसके दादा की याद आ जाती है।   

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