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मैं यहां, मेरा जोड़ीदार कहां? : एकता कपूर

नशा और वह भी भांग का..बड़े-बड़ों का दिल खुल जाता है इसके बाद तो। अब अपनी एकता कपूर को ही लीजिए। ‘क’ अक्षर से टीवी सीरियल्स की कतार खड़ी करने वाली एकता परसों एक होली-बैश में अपने खबरी लाल को मिल गईं। जहां सब के चेहरे पीले, लाल और गुलाबी थे, वहीं एकता के माथे पर हमेशा की तरह काले रंग का बड़ा-सा टीका लगा था और उनके सामने रखी थाली में भी काले रंग का गुलाल था, जो वह खासतौर से ज्योतिषी से लेकर आई थीं।

इस हुड़दंग भरे माहौल में पहले तो खबरी लाल की हिम्मत नहीं हुई। मगर भांग के चंद पकौड़े और दो गिलास ठंडाई गटकने के बाद उसके अंदर का पत्रकार जागा और वह पहुंच ही गया एकता कपूर के पास, जो तब तक उससे दोगुने पकौड़े और ठंडाई अपने गले के नीचे उतार चुकी थीं। अब यह भांग का नशा था या कुछ और, लेकिन हमेशा अपनी अकड़ में तन कर रहने वाली एकता खबरी लाल से जिस अंतरंगता से मिलीं और जिस तरह से उन्होंने उसे अपने दिल का हाल सुनाया, वह काबिल-ए-गौर था।

हम तो उस बातचीत को आप तक पहुंचा भर रहे हैं। आपने ‘क’ अक्षर से ही बहुत सारे सीरियल बनाए, ऐसा क्यों? डरते-डरते पूछे गए इस सवाल पर एकता ने कहा, ‘दरअसल जब मैं छोटी थी तो बहुत काली थी और सभी लोग मुझे काली-कलूटी- कल्लो जैसे नामों से बुलाते थे। बस तभी मैंने यह तय कर लिया था कि बड़ी होकर मैं इस अक्षर को इज्जत दिलाऊंगी।’ तो फिर इधर आपने इस अक्षर से नाता क्यों तोड़ लिया है?  एकता ने जवाब दिया, ‘असल में मुझे एजुकेशन मिनिस्टर ने फोन करके कहा था कि मैं ‘क’ अक्षर वाले सीरियल न बनाऊं ।

उनका कहना था कि हमारे स्कूलों की टीचर्स रात को मेरे सीरियल देखती हैं और सुबह उसकी खुमारी में स्कूल जाकर ‘क’ से कबूतर की बजाय ‘कहानी बेघर की’ या ‘क्योंकि सास भी कभी नई थी’ पढ़ाती हैं। बस इसीलिए मैंने यह अक्षर छोड़ा था। लेकिन अब और नहीं। अब मैंने तय कर लिया है कि मेरे सारे सीरियल सिर्फ और सिर्फ ‘क’ अक्षर से ही शुरू होंगे,’ हाथ उठा कर एकता ने कुछ इस अंदाज में कहा, जैसे शायद कभी जिल्लेइलाही ने अनारकली को दीवार में चुनवाने का हुक्म दिया होगा। उसी उठे हुए हाथ से एकता ने वहां से गुजर रहे एक वेटर की ट्रे में से एक गिलास भांग उठाई और नॉन-स्टाप पीकर बोलीं-‘बहुत जल्द मेरे चार सीरियल फ्लोर पर जाने वाले हैं और उन सबके नाम ‘क’ से ही हैं।’

खबरी लाल की बांछें खिल चुकी थीं। उसे ब्रेकिंग न्यूज मिल रही थी और वह भी सीधे फ्रॉम द माउथ ऑफ एकता। अब एकता खुद ही बोले जा रही थीं, ‘मेरे पहले सीरियल का नाम होगा ‘कामिनी एम़ एम़ एस़’। यह एक खालिस पारिवारिक सीरियल होगा, जिसमें मैं अपने प्रोडक्शन की फिल्म ‘दामिनी एम़ एम़ एस.’ की हीरोइन को लूंगी। उस बेचारी को वैसे भी अब तक कोई काम नहीं मिला है। इसमें वह एक अमीर फैमिली की सबसे छोटी बहू कामिनी का रोल करेगी, जिसकी शादी से पहले बने एक एमएमएस को लेकर उसका प्रेमी उसे परेशान करता है और एक दिन वह उसका खून कर देती है। उसके जेल जाने और फिर बाइज्जत छूट कर वापस आने की इस संघर्ष भरी दास्तान को देख कर किसी को भी हंसी आ जाएगी।’

जी, वो तो है, कह कर खबरी लाल ने एकता से फटाफट उनके दूसरे सीरियल के बारे में पूछा तो वह बोलीं, ‘इस सीरियल का नाम होगा ‘कड़े अच्छे लगते हैं’। असल में यह एक ऐसी औरत की कहानी है, जिसने अपने पति के कारोबार के लिए अपने सोने के कड़े गिरवी रख दिए और जब पति का बिजनेस चल निकला तो उसने अपनी सेक्रेटरी से संबंध बना लिए। अब इस औरत को अपने पति को भी वापस लाना है और अपने कड़ों को भी। लेकिन इस बेचारी के पास फुर्सत ही नहीं है। किटी पार्टीज, किचन पॉलिटिक्स जैसी तमाम चीजों के साथ-साथ इसमें मैं कॉमेडी भी डालूंगी।’

इससे पहले कि खबरी लाल कुछ पूछता, एकता ने अपने तीसरे सीरियल के बारे में बताना शुरु कर दिया, ‘इस सीरियल का नाम होगा ‘कविता भाभी,’ जिसमें एक औरत अपने गली-मोहल्ले के भोले-भाले देवरों को फांस कर उन्हें ब्लैकमेल करती है। वैसे वह पतिव्रता किस्म की औरत है, जो अपने अपाहिज पति और घर का खर्चा निकालने के लिए मजबूरन यह सब करती है।’ भांग के दो गिलास और आ चुके थे। खबरी लाल ने इंटरव्यू खत्म करने के इरादे से फटाफट पूछा कि ‘अपने चौथे सीरियल के बारे में बताइए?’ पर यह क्या, एकता के होठों पर चुप्पी थी और आंखों में गीलापन।

दोबारा पूछने पर वह काफी भावुक होकर बोलीं, ‘इसका नाम है-‘कभी तो मेरी शादी होगी’। यह एक ऐसी लड़की की कहानी है, जो एक बहुत बड़े फिल्म स्टार की बेटी है, लेकिन उसका कोई बॉयफ्रैंड नहीं है। फिल्म इंडस्ट्री में कोई उसकी तरफ नहीं देखता। तब यह लड़की टी़ वी़ सीरियल बनाने लगती है, लेकिन तब भी उसका कोई बॉयफ्रैंड नहीं बनता। देखते ही देखते वह टीवी इंडस्ट्री की महारानी बन जाती है, लेकिन तब भी उसका कोई बॉयफ्रैंड नहीं है। उसके शोज देख कर करोड़ों लोगों को मजाा आता है और हजारों लोगों को रोजगार मिलता है, लेकिन उसका कोई बॉयफ्रैंड नहीं है।

कहते हुए एकता  ने खबरी लाल का हाथ हौले से दबाया तो वह निरीह जीव उछल पड़ा। ‘वाकई बहुत दर्द भरी कहानी है,’ खबरी लाल ने कहा तो एकता की आंखों में आंसू आ गए और रुंधे हुए गले से वह बोलीं, ‘आपकी शादी हो गई क्या?’ बेचारा खबरी लाल इस सवाल से अभी संभला भी नहीं था कि उसने अपने हाथ पर एकता के हाथ का दबाव महसूस किया, ‘बताइए न।’ ‘जी.जी’ वह बाल-बच्चोंदार प्राणी ठीक से हकला भी नहीं पा रहा था। एकता का हाथ छुड़ा कर वह वहां से भागा तो सीधे दफ्तर पहुंच कर सांस ली। एकता को तो पता भी नहीं कि बेचारे खबरी लाल का नशा काफूर हो चुका है।   

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