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मुझे पटकथा से प्यार हो गया!

लाहौर के रहने वाले अली जफर आज भारत के लिए जानी-मानी हस्ती बन चुके हैं। उनकी पहली भारतीय फिल्म तेरे बिन लादेन ने ही उन्हें स्टार बना दिया था। अली जफर न सिर्फ एक्टर हैं, बल्कि गायक और संगीतकार भी हैं। युवाओं के बीच अपने म्यूजिक एलबम के जरिए वह पहले ही मशहूर हो चुके हैं। एक बार फिर लंदन, पेरिस और न्यूयॉर्क के जरिए वे दर्शकों से मिलने आए हैं। इस फिल्म में अभिनय के साथ गायन और संगीत की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली है। उनके अनुभव उन्हीं के शब्दों में सुनते हैं।

शुक्रिया बॉलीवुड!
बॉलीवुड में अभिनेता के रूप में मुझे पसंद किया जा रहा है। मुझे बॉलीवुड में जो पहचान मिली है, वह अविश्वसनीय लगती है। हालांकि मेरे पैर जमीन पर ही हैं। अभी तक मेरा दिमाग आसमान पर नहीं पहुंचा है। शायद पहुंचेगा भी नहीं। वजह यह कि मैं 18 साल से लगातार मेहनत कर रहा हूं। काफी संघर्ष किया है। मसलन मेरे पहले संगीत एलबम हुक्का पानी को बाजार में आने में ही तीन साल लग गए थे, लेकिन उसके बाद की मेरी यात्रा सुखद रही है। मैं तो दिल से एक कलाकार हूं। मुझे उस वक्त सबसे ज्यादा खुशी मिलती है, जब मैं काम करता रहता हूं। उससे भी ज्यादा खुशी का अहसास होता है, जब मेरे काम की तारीफ होती है। महज दस माह के अंदर मैंने चालीस फिल्मों के ऑफर ठुकराए हैं। सिर्फ दो फिल्में लंदन पेरिस न्यूयॉर्क व चश्मेबद्दूर की रीमेक फिल्म को ही स्वीकार किया है।

लंदन, पेरिस, न्यूयॉर्क
मुझे फिल्म का नाम और इसकी पटकथा पसंद आई। जब मैंने इस फिल्म की पटकथा को पहली बार पढ़ा तो मुझे पटकथा से प्यार हो गया। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि फिल्म के निर्देशक अनु मेनन ने मुझे इस फिल्म के किरदार के काबिल समझा। फिल्म किसी भी इंसान के उम्र के बीसवें साल का चित्रण करती है, जब इंसान को करियर बनाना होता है, साथ ही एक नया रिश्ता जन्म ले रहा होता है। फिल्म में तीन अध्याय हैं। इन तीनों अध्याय में समय के अनुसार दोनों पात्रों के दिमागी स्तर का चित्रण है। तीन पुल व तीन नदी प्यार के स्तर को रेखांकित करते हैं। फिल्म में मैं निखिल का किरदार निभा रहा हूं, जो आम जिंदगी के करीब है।

शहर के हिसाब से रचा संगीत
अंतरराष्ट्रीय संगीत में माना जाता है कि फिल्मों में अभिनय कर रहा कलाकार अपने लिए खुद गीत गाता है तो मैंने उसी पैटर्न को अपनाते हुए फिल्म में खुद ही गीत गाए हैं। संगीत की धुनें भी मैंने ही तैयार की हैं। संगीत रचते वक्त मैंने इस बात का ध्यान रखा है कि उसका ट्रीटमेंट एक चरित्र की तरह से हो। दरअसल मैं ताजगी से भरा संगीत रचना चाहता था,जो कि फिल्म के पात्रों और उन शहरों से भी रिलेट कर सके, जिनसे यह कहानी गुजरती है।

बोल्ड सीन
फिल्म की पटकथा की मांग के अनुसार कुछ बोल्ड सीन जरूर हैं, पर यह अश्लील नहीं हैं। यह फिल्म युवाओं की असली भावनाओं को दर्शाती है, इसलिए थोड़े बहुत रोमानी सीन की दरकार पड़ी।

चश्मेबद्दूर में मैं
मैंने चश्मेबद्दूर की रीमेक फिल्म में अभिनय करना स्वीकार किया क्योंकि यह फिल्म मुझे खासी पसंद आई। मैंने इसमें फारुख शेख वाला किरदार ही निभाया है। इस किरदार को निभाते हुए मैंने काफी एंज्वॉय भी किया।

प्रोफाइल
मैंने पाकिस्तान में करियर की शुरुआत मॉडलिंग व अभिनय से की थी। साथ ही पाकिस्तान टीवी पर लिंदा बाजार, कॉलेज जीन्स,कांच के पर सहित कई सीरियलों में अभिनय किया था। इतना ही नहीं, मैंने सबसे पहले पाकिस्तान में लक्स साबुन को एंडोर्स किया था। इसके अलावा हेड एंड शोल्डर, क्लोजअप, तरंग टी सहित करीबन तीस पैंतीस प्रोडक्ट्स के लिए मॉडलिंग कर चुका हूं, लेकिन संगीत मेरा शौक है। मुझे संगीत में कुछ जरूरत से ज्यादा रुचि है।

इसी वजह से बाद में संगीत पर ध्यान देना शुरू किया। संगीत में मेरे दो एलबम हुक्का पानी और मस्ती बाजार में आए। दोनों एलबम सुपर डुपर हिट हो गए। मेरे इन संगीत एलबमों की शोहरत को देखते हुए मुझे पाकिस्तानी फिल्म खुादा के लिए में अभिनय करने का आफर मिला था, पर विदेशों में कुछ स्टेज शो पहले से तय थे, इसलिए मैं कर नहीं पाया। उसके बाद जब मुझे भारत में फिल्म तेरे बिन लादेन में अभिनय करने का ऑफर मिला तो इसकी विषयवस्तु मुझे इतनी पसंद आई कि मैंने हामी भर दी। इसके बाद मुझे मेरे ब्रदर की दुल्हन में काम करने को मिला। इन दोनों फिल्मों ने मुझे स्टार बना दिया।
शान्तिस्वरुप त्रिपाठी

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