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ग्रामीण इलाके में बदल रही सोच, परिजन कर रहे मदद

लेफ्ट-राइट-लेफ्ट, दाएं मुंड़.., यदि आप सुबह और शाम को झारखंड के गढ़वा जिले के मझिआंव-कांडी मुख्य सड़क पर अवस्थित सोनपुरवा गांव से गुजरें, तो परेड के ये लोकप्रिय शब्द आपको सुनाई पड़ेंगे। लेकिन यहां न कोई सैनिक छावनी है और न ही किसी बल का प्रशिक्षण केंद्र।

इस गांव में है योगेंद्रनाथ यादव की अकादमी, जहां करीब दो सौ युवक सेना, पुलिस और अन्य अर्धसैनिक बलों में नियुक्त होने के लिए नि:शुल्क प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। कांडी प्रखंड का सोनपुरवा गांव कभी गरीबी, बेरोजगारी और पलायन के लिए जाना जाता था।

यहां न कोई पक्का मकान था और न ही किसी घर में टीवी। कभी सोनपुरवा और आसपास के आधा दजर्न गांव के पुरुष कमाने के लिए बाहर जाते थे। उनमें से कई तो कभी लौट कर नहीं आए। आज इन गांवों में पक्के मकान हैं, बाइक और टीवी है। इन गांवों की तसवीर पूरी तरह बदल गई है।

बदलाव की यह कहानी गांवों के बेरोजगार युवाओं ने लिखी है। उन्हें रास्ता दिखाया गरदाहा हाई स्कूल के पीटी टीचर योगेंद्रनाथ यादव ने। उन्होंने इलाके के युवकों को सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों में भरती होने की सलाह दी। फिर अकेले दम पर उन्हें प्रशिक्षित करने लगे।

उन्होंने युवकों को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया। जल्दी ही सफलता मिली। उनके द्वारा प्रशिक्षित आधा दजर्न गांवों के लगभग 50 नवयुवक सेना में भरती हो गए। जयशंकर राम, सरीखा, अमित, सोनपुरवा के बसंत, नागेंद्र, महेंद्र, रूपेश, देवडीह के पंकज और रमेश, अधौरा के बीरेन्द्र, प्रेमचंद, गोपाल, शिवनाथ जैसे युवक आज भारतीय सेना में हैं।

इनके अलावा सोनपुरवा के 21, देवडीह के दो, डेमा के 12, सतबहिनी के चार और अधौरा के पांच युवक भी सेना में हैं। सीआरपीएफ, सीआइएसएफ, आइटीबीपी, एसएसबी, आइआरबी, जैप, बीएसएफ और जिला पुलिस में भी इलाके के कई युवक हैं।

बदलाव के प्रति युवाओं के झुकाव को देखते हुए यादव ने सोनपुरवा में एक अकादमी खोल ली। इसमें युवकों को मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाता है। आज यहां  कुशहा, डेमा, सतबहिनी, सोनपुरवा, अधौरा, देवडीह और खुटहेरिया के करीब दो सौ युवक शारीरिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। अकादमी में उन्हें ऊंची कूद, लंबी कूद, दौड़, गोला फेंक और योग के कठिन गुर सिखाए जाते हैं।

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