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कोसी बांध के भीतर रहने वालों को मिलेगी बिजली

सूबे के ऊर्जा, निबंधन, उत्पाद व मद्य निषेध और संसदीय कार्य मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव ने विधानसभा में कहा कि राज्य के साथ हो रहे दोहरे व्यवहार के कारण बिजली के दाम बढ़ रहे हैं।

झारखंड, ओडिसा, पश्चिम बंगाल और छतीसगढ़ का कोयला पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों में जाता है, लेकिन कहलगांव स्थित एनटीपीसी को कोयला इंडोनेशिया और मलेशिया से मिलता है। केन्द्र ने तीन फीसदी विदेशी कोयले का उपयोग अनिवार्य किया है, जिसका खामियाजा बिहार को उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही बिहार को दक्षिण के राज्यों की तुलना में डेढ़ गुना ट्रांसमिशन चार्ज भरना पड़ रहा है।

एनटीपीसी कहलगांव का आलम यह है कि 2006-07 में बिजली का दाम 1.89 रुपए प्रति यूनिट था, जो 2011-12 में बढ़ाकर 3.50 रुपए कर दिया गया। इसके एवज में राज्य को 3129 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है।

ऐसे में आम उपभोक्ताओं को फ्यूल सरचार्ज का भार उठाना मजबूरी है। वैसे बिहार विद्युत विनियामक आयोग फ्यूल सरचार्ज तय करता है। जदयू के डा. इजहार अहमद के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि बिजली बिल में गड़बड़ी को दूर करने के लिए पेसू के अधिकारियों और शिकायत कोषांग के नम्बर सार्वजनिक किए गए हैं।

बिजली बोर्ड के अध्यक्ष भी महीने में एक बार जनता दरबार लगाते हैं। राजद के डा. अब्दुल गफूर को श्री यादव ने बताया कि कोसी बांध के भीतर रहने वालों को गैर परम्परागत स्नोतों से बिजली देने की योजना है। बिहार जल विद्युत निगम इसके लिए नोडल एजेंसी है।

सहरसा के महिषी और नवहट्टा प्रखंड के तहत कोसी बांध के भीतर रहने वालों को बिजली आपूर्ति करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही ऐसे क्षेत्रों में बिजली की व्यवस्था की जाएगी।

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