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घाटे की रेल

कुछ ही दिनों में यह साफ हो जाएगा कि रेलवे के यात्री किराये में बढ़ोतरी होगी या नहीं। वैसे, माल ढुलाई के किराये को बढ़ाकर सरकार पिछले दरवाजे से अपनी आमदनी बढ़ाती ही रही है। फिर भी आज हमारा रेल तंत्र घाटे में है। हजारों करोड़ का अतिरिक्त बोझ इस पर है। ऐसे में, भारतीय रेलवे को अपनी आमदनी बढ़ाने के और नुस्खे ढूंढ़ने होंगे। इस क्रम में सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि रेलवे प्रबंधन स्कूलों व इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना करे। इससे उसकी आय का स्नोत बढ़ेगा और मूल्यवान कर्मचारियों की कमी भी दूर हो जाएगी। रेल यात्रा के दौरान अक्सर विदेशी सैलानियों को भाषायी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस तरफ भी रेलवे को ध्यान देने की जरूरत है। अगर रेल प्रबंधन इस तरफ ध्यान देता है, तो कहने की जरूरत नहीं कि रेलवे को धन की कमी कभी नहीं होगी। एक बात और। हरेक कोच में सीसीटीवी कैमरे का इंतजाम किया जाए। इससे गाड़ियों में सवार होने वाले संदिग्धों की पहचान मुमकिन हो पाएगी। यही नहीं, इससे बेटिकट यात्रियों को पकड़ने के अभियान में तेजी आएगा। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं का खयाल रखना रेल महकमे की जिम्मेदारी है। अगर यात्रा सुरक्षित तथा आरामदेह होगी, तभी तो अधिक से अधिक मुसाफिर इस सेवा का लाभ उठाना चाहेंगे।
सुमन सिंह, बिहार

इंटरनेट का इंद्रजाल
इसमें कोई दोराय नहीं कि इंटरनेट ने हमारी जिंदगी को काफी सरल बना दिया है। अब आप जो कुछ भी चाहते हैं, उसे इंटरनेट के जरिये कुछ ही मिनटों में हासिल कर लेते हैं। एकदम वरदान की तरह है यह। एक मिनट में आप न्यूयॉर्क के किसी पुस्तकालय में पहुंच जाते हैं और अगले ही मिनट में नागपुर। परंतु अपने फायदे के लिए हम वरदान का भी गलत इस्तेमाल करने लगते हैं। इंटरनेट के संदर्भ में भी ऐसा ही हो रहा है। इंटरनेट पर अश्लील, भड़काऊ सामग्रियों की बाढ़-सी आ गई है और कोई भी इसे रोकने को तैयार नहीं है। इस तरफ सर्विस प्रोवाइडर, यूजर और सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। वरना इंटरनेट के इंद्रजाल को मकड़जाल बनने में देर नहीं लगेगी। 
रजनी अग्रवाल, सरस्वती विहार, दिल्ली

खबर और खेल
हमारा मीडिया ज्यादातर क्रिकेट को ही कवर करता है, ऐसा क्यों? क्या दूसरे खेल अनिश्चितताओं से भरे नहीं होते? क्या अन्य खेलों में खबरों का अकाल है? ये सारे सवाल पत्रकारों से पूछे जाने चाहिए। पिछले दिनों तो तब हद हो गई, जब भारतीय हॉकी टीम ओलंपिक में क्वालीफाई करने के लिए शानदार प्रदर्शन कर रही थी, लेकिन हमारा मीडिया यह जानने में जुटा था कि क्या धौनी और वीरू में अनबन है? और अगर है, तो इसकी वजह क्या है? उससे पहले युवराज की बीमारी की खबर को काफी ताना गया। किसी भी बीमार खिलाड़ी के प्रति सहानुभूति से किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। मुङो भी नहीं है। पर प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना हमारे संस्कार में रचा-बसा है। हमें दूसरे खेलों की तरफ ध्यान देना चाहिए। सच तो यह है कि हमारा राष्ट्रीय खेल कैंसर से जूझ रहा था। अब लंदन ओलंपिक हमारा इंतजार कर रहा है। वक्त आ गया है कि क्रिकेट से हटकर और खेलों को अवसर दिया जाए।
हिमांशु दुबे, आश्रम, नई दिल्ली

आतंक के खिलाफ
पिछले दिनों दिल्ली के सबसे सुरक्षित इलाके में बम विस्फोट हुआ। इसके बाद दिल्ली पुलिस को और सतर्क होना पड़ेगा। हमारा मुल्क पहले ही आतंकी निशाने पर है, इसलिए हम इसे इजरायल-ईरान खींचतान की युद्धभूमि नहीं बनने दे सकते।
वीरेंद्र सिंह जरयाल, कृष्णा नगर, दिल्ली

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