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सूचना आयुक्त के रूप में योग्यता को तरजीह दें: शाह

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह ने शुक्रवार को कहा कि सूचना आयोगों में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में नौकरशाहों के स्थान पर योग्य और कार्यकुशल लोगों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

एसके मेमोरियल सभागार में सूचना का अधिकार पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शाह ने कहा कि कई बार राजनीतिक संरक्षण के कारण के कारण नौकरशाहों को सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त किया जाता है, जिसमें अधिक वांछनीय यह होगा कि ऐसे प्रमुख पदों पर अधिक से अधिक योग्य लोगों को नियुक्त किया जाए।

पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि सूचना आयुक्तों को आवेदनकर्ताओं को सूचना नहीं मिलने पर सूचना अधिकारियों को दंडित करने का अधिकार दिया गया है, लेकिन नौकरशाहों को दंडित करने के मामले मे कम ही प्रयोग किया जाता है।

शाह ने कहा कि 10 वर्ष के आंदोलनों के बाद सूचना का अधिकार मिला है। काफी इंतजार के बाद लोकतंत्र मजबूत करने का बड़ा आंदोलन मिला है, जिसमें ग्रामीण भारतीयों की भूमिका रही है।

लोकपाल के लिए अन्ना हजारे के आंदोलन को शहरी मध्य वर्ग का आंदोलन बताते हुए शाह ने कहा कि यह तेजी से बढ़कर एक वर्ष में ही शांत हो गया। शाह ने कहा कि बिहार, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ में एक आवेदन से केवल एक ही सूचना का अधिकार प्रदान का प्रावधान है।

इसे दूर करना चाहिए। केंद्र ने भी एक प्रयास किया था और इसे विरोध के बाद छोड़ दिया। राज्यों को भी इस पर ध्यान देना चाहिए।

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