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मुस्लिम वोटों को लुभाने की पुरजोर कोशिश

उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए हो रहे चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को छोड़ सभी दलों ने मुसलमानों के वोट पर नजर रखी और उन्हें लुभाने की पूरी कोशिश की। दस जिलों की साठ विधानसभा सीटों पर कल होने वाले मतदान में भी मुस्लिम मतदाताओं पर नजर है। इन सीटों पर अल्पसंख्यक प्रत्याशी सबसे ज्यादा हैं।
 
राज्य की 403 विधानसभा सीटों पर इस बार विभिन्न दलों ने प्रत्याशियों को टिकट दिया है। 778 मुस्लिम बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सबसे अधिक 83 मुसलमानों को, समाजवादी पार्टी (सपा) ने 81 और कांग्रेस ने अपने कुल 359 प्रत्याशियों में 58 मुसलमानों को प्रत्याशी बनाया है। इन दलों का मकसद पार्टी में मुसलमानों को प्रतिनिधित्व देने के साथ मुस्लिम वोट को आकर्षित करना भी रहा है।
 
मुस्लिम वोट हासिल करने के लिए उनका आरक्षण बढ़ाने के बारे में दिए गए बयान से केन्द्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा निर्वाचन आयोग के निशाने पर भी आए। आयोग को खुर्शीद की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से भी शिकायत करनी पड़ी। खुर्शीद के माफी नामे के बाद मामला शांत हुआ।
 
सातवें चरण के मतदान में सबसे अधिक 239 मुस्लिम प्रत्याशी हैं। कांग्रेस गठबंधन के सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने तीन मुसलमानों को टिकट दिया है। दिलचस्प है कि इस अंतिम चरण में भाजपा का भी एक मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में है। पार्टी ने सहसवान सीट से शकील आलम को मैदान में उतारा है।
 
पिछले छह चरण के मतदान में मुसलमानों की भागेदारी काफी अच्छी रही है। उस दौरान खासकर मुस्लिम महिलाएं पुरूषों के मुकाबले बडी संख्या में मतदान केन्द्र तक पहुंची। मुस्लिम बहुल सहारनपुर और आजमगढ़ की कुछ सीटों पर 70 प्रतिशत मतदान होने से कांग्रेस और सपा की उम्मीद बढ़ी है। पीस पार्टी और उलेमा कौंसिल ने भी मुस्लिम वोट पर उम्मीद बांध रखी है।
 
कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मारूफ खान ने दावा किया कि मुसलमानों के वोट पार्टी के पक्ष में आए हैं। ऐसा ही दावा सपा का भी है। सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि मुसलमानों के ज्यादा वोट देने से यह तय होगा।

अयोध्या में छह दिसम्बर 1992 को विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद मुसलमान कांग्रेस से नाराज हो सपा के खेमे में आ गए थे। पिछले लोकसभा के चुनाव में सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने ढांचा गिराए जाने के दोषी भाजपा के पूर्व नेता कल्याण सिंह से दोस्ती की तो मुसलमान वोट छिटककर कांग्रेस के पक्ष में आ गया।

विधानसभा के इस चुनाव में बटला हाउस मुठभेड़ और मुसलमानों के लिए आरक्षण बढ़ाए जाने का मुद्दा उठाकर कांग्रेस ने सहानुभूति लेने की कोशिश की। सपा ने भी मुसलमानों के आरक्षण का कोटा बढ़ाने की बात करके मुसलमानों को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया।
 
बसपा ने चुनाव में मुसलमानों के लिए काम को गिनाया। कौमी एकता दल, उलेमा कौंसिल तथा पीस पार्टी ने मुसलमान वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की। इन दलों का आधार ही मुस्लिम वोट है। कल के मतदान में रामपुर की स्वार सीट पर सबसे अधिक 14 मुस्लिम प्रत्याशी हैं। इस सीट पर कुल 17 प्रत्याशी हैं।

बदायूं की संभल सीट पर कुल पन्द्रह प्रत्याशियों में से 11 मुस्लिम उम्मीदवार हैं। रामपुर की चमरौहर सीट पर 24 प्रत्याशियों तथा इसी क्षेत्र की बिलासपुर सीट से दस मुस्लिम चुनाव मैदान हैं।

बिजनौर सीट पर दस और धामपुर सीट पर नौ मुस्लिम उम्मीदवार हैं। मुरादाबाद ग्रामीण, ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद नगर, नूरपुर तथा चांदपुर सीट पर भी काफी संख्या में मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

छठे चरण के लिए 68 सीटों पर 28 फरवरी को हुए मतदान में 188 मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में थे। सपा ने सबसे अधिक सोलह और बसपा ने 14 मुसलमानों को उम्मीदवार बनाया था जबकि कांग्रेस ने आठ और रालोद ने पांच प्रत्याशी इस चरण मैदान में उतारे।

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