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'अभी कोहली को नहीं बनाना था उपकप्तान'

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वसीम अकरम भी एशिया कप के लिए विराट कोहली को उपकप्तान बनाए जाने के मुद्दे पर पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर के समान ही विचार रखते हैं।
 
अकरम ने कहा कि भारतीय चयनकर्ताओं ने संभवत 2015 में होने वाले विश्वकप को देखते हुए यह फैसला लिया है लेकिन मौजूदा परिस्थिति में यह निर्णय सीनियर भारतीय खिलाड़ियों के साथ किया गया अन्याय है। उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि एशिया कप के लिए विराट को टीम का उपकप्तान बनाया जाना भारत के सीनियर खिलाड़ियों विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर को बुरा लगेगा क्योंकि वे दोनों ही काफी समय से भारतीय टीम का कप्तान बनना चाहते हैं।
 
अकरम ने कहा कि टीम इंडिया का उपकप्तान बनना कोई हंसी खेल नहीं है। इसमें कोई शक नही है कि विराट ने ऑस्ट्रेलियाई दौरे में श्रीलंका के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करके अपनी काबिलियत दिखा दी है। इसी प्रदर्शन की बदौलत वह उपकप्तान पद के एक प्रबल दावेदार के रूप में भी उभरे लेकिन इसके बावूजद भी सीनियर खिलाड़ियों की भावनाएं तो आहत होंगी ही।

उन्होंने कहा कि चयनकर्ताओं ने शायद अगले विश्वकप के बारे में सोचते हुए ही यह निर्णय लिया कि अगर उस समय तक मौजूदा कप्तान महेंद्र सिंह धौनी फिट नहीं रहे तो उनकी जगह लेने के लिए विराट पूरी तरह तैयार रहेंगे।
 
इससे पहले भी अकरम ने कहा था कि चयनकर्ताओं को विराट को उपकप्तान पद देने से पहले कम से कम पांच साल इंतजार करना चाहिए था। इसी तरह गावस्कर ने भी विराट को उपकप्तान बनाने से पहले उन्हें कुछ और समय देने की वकालत की थी ताकि वह और ज्यादा अनुभव अर्जित कर सकते और अपने ऊपर आई इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकते।
 
गावस्कर ने कहा था कि विराट को उप कप्तान बनाना गौतम गंभीर के साथ अन्याय है। विराट के सामने अभी कई मौके हैं और वह भविष्य के भारतीय कप्तान हैं लेकिन इससे पहले उन्हें टीम में अपन जगह मजबूत करनी होगी। श्रीलंका के खिलाफ उनके प्रदर्शन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है लेकिन तब भी उन्हें और अनुभव प्राप्त करने की जरूरत है।

अकरम ने एशिया कप के लिए सहवाग को टीम में न चुने जाने के बाद के.श्रीकांत और सहवाग के बयानों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि भारतीय चयनकर्ता सहवाग जैसे खिलाड़ी को टीम से हटाने से डरते हैं। मेरी समझ से यह अच्छी सोच नहीं है। जब तक आप खराब प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को टीम से हटाने का साहस नहीं करते तब तक उनमें टीम में वापस आने का जज्बा कैसे आएगा।
 
उन्होंने कहा कि टीम से हटाए जाने के बाद ही उसमें लौटने की तड़प खिलाड़ी को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उत्साहित करती है। खराब प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ी को विश्रम देने की बात मुझे आज तक समझ में नहीं आई। मेरे लिए यह एक बकवास है। मेरी समझ से या तो कोई खिलाड़ी खेलता है या उसे टीम से हटाया जाता है। यहां कोई बीच का रास्ता नहीं होता। यह बहुत ही आसानी से समझ में आने वाली बात है।
 
गौरतलब है कि एशिया कप के लिए टीम से बाहर किए जाने की खबरों का खंडन करते हुए सहवाग ने शुक्रवार  को ही यह बयान दिया था कि उन्हें टीम से हटाया नही गया है बल्कि उन्होंने खुद ही श्रीकांत से विश्रम देने का आग्रह किया था और श्रीकांत ने भी यही बात दोहराई थी।

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